Home / News / महिला सशक्तिकरण की परिवर्तनकारी आवाज़: बकानी झालावाड़ की बेटीडॉ. हेमलता की प्रेरणादायक यात्रा

महिला सशक्तिकरण की परिवर्तनकारी आवाज़: बकानी झालावाड़ की बेटीडॉ. हेमलता की प्रेरणादायक यात्रा

राजस्थान की धरती हमेशा से सेवा,संस्कार और समाज सुधार की प्रेरणादायक कहानियों की जननी रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाली एक प्रेरक व्यक्तित्व हैं बकानी झालावाड़ की बेटी डॉ. हेमलता गांधी सुपुत्री शकुंतला बाई – रामदयाल गांधी ( समाज सेवी )। जिन्होंने एक छोटे से गाँव बकानी से निकलकर महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सेवा और गौसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी डॉ. हेमलता गांधी ने बचपन से ही समाज में महिलाओं की चुनौतियों को करीब से देखा। शिक्षा की कमी, आर्थिक निर्भरता और सामाजिक संकोच के कारण कई महिलाएँ अपनी प्रतिभा के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाती थीं। इन परिस्थितियों ने उनके मन में एक मजबूत संकल्प पैदा किया कि महिलाओं को जागरूक, शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही उनके जीवन का उद्देश्य होगा।डॉ.हेमलता गांधी ने वर्षों से अक्षम महिलाओं, बेटियों ,को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए एवं गुणवत्ता के साथ प्रेरित किया है। उनके मार्गदर्शन और प्रयासों से अनेक महिलाएँ शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक नेतृत्व की दिशा में आगे आई हैं। वे महिलाओं को केवल अधिकारों की बात नहीं बतातीं, बल्कि जिम्मेदारी, संस्कार और समाज के प्रति संवेदनशीलता का महत्व भी समझाती हैं। उनके अनुसार सशक्त महिला वह है जो परिवार, समाज और अपने व्यक्तिगत विकास के बीच संतुलन स्थापित कर सके।वर्तमान में डॉ. हेमलता गांधी नगर निगम कोटा में सामाजिक विकास प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं ,वह झालावाड़ में भी सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान की जिला परियोजना समन्वयक रह चुकी है ,उनके कार्यकाल के दौरान जिले की कई पंचायतों को राष्ट्रपति से निर्मल ग्राम पुरस्कार सम्मान प्राप्त होने का गौरव प्राप्त हुआ था,तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रदेश की पहली मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया थी ,जिनके अनुभव ,नेतृत्व और हौसला बुलंदी का सहारा सुश्री हेमलता को मिला। इस जिम्मेदारीपूर्ण पद पर रहते हुए साथ ही उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से महिलाओं और वंचित समुदायों के विकास के लिए अनेक योजनाओं और जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय योगदान दिया है। उन्होंने सेवा को केवल एक सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक सतत संकल्प के रूप में अपनाया है।महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ उनका जीवन गौसेवा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भारतीय संस्कृति में गौसेवा को करुणा और सेवा का प्रतीक माना जाता है, और इसी भावना के साथ वे समाज में गौसंरक्षण और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती हैं।समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. हेमलता गांधी को अब तक कई सैकड़ों सम्मान और पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है ,जिनमें डॉ भीमराव अंबेडकर महिला कल्याण पुरस्कार ,भास्कर वुमेन ऑफ द ईयर(संभाग स्तर) सम्मान खुद वसुंधरा राजे के कर कमलों द्वारा प्राप्त हुआ जो बकानी झालावाड़ के लिए उस समय सबसे गौरव का विषय पूरे प्रदेश में बकानी का नाम रोशन हुआ था ,आज डॉ हेमलता गांधी गांव की बेटियों ही नहीं अपितु पूरे कोटा संभाग की महिलाओं बेटियों को आगे बढ़ाने का कार्य करती है। सादगी और मितव्ययता से रहकर साधक जैसा जीवन कोई हेमलता से सीखे। उनके बड़े भाई देवेश गांधी और छोटे भाई डॉ नयन प्रकाश गांधी और दोनों भाभी प्रिया एवं प्रीति गांधी भी समाज सेवा में उतनी ही तल्लीनता से सेवा में संलग्न है ,यह सब माता पिता की परवरिश ,उनके सामाजिक संस्कार और गायत्री परिवार के संस्कारों अध्यात्म शक्ति की बदौलत है कि सभी अपने कार्य के साथ साथ समाज सेवा की भावना सदैव उन्हें बनाए रखती है ।हेमलता गांधी को प्राप्त कई सम्मान उनके निरंतर सेवा भाव, सामाजिक समर्पण और प्रेरणादायी कार्यों की स्वीकृति के रूप में देखे जाते हैं। डॉ. हेमलता गांधी की विशेषता यह है कि वे सशक्तिकरण को केवल आधुनिकता से नहीं जोड़तीं, बल्कि उसे भारतीय संस्कारों, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़कर देखती हैं। उनका मानना है कि जब महिलाएँ शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारवान बनती हैं, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।आज डॉ. हेमलता गांधी अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनकी जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो छोटे से गाँव से निकलकर भी समाज में बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।वास्तव में, डॉ. हेमलता गांधी सेवा, संवेदना और महिला सशक्तिकरण की एक सशक्त मिसाल हैं, जिनका कार्य समाज के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

Tagged:
[post-views]
Share
Now