संवाददाता: ई. सैयद फरहान अहमद अलिग (वरिष्ठ पत्रकार)
स्थान: पटना
तारीख: 21 मई, 2026 (नोट: अखबार में खबर अगले दिन की तारीख से छपती है)
बिहार में 40 हजार से अधिक दवा दुकानें रहीं बंद, राजधानी के आईजीआईएमएस और पीएमसीएच में दवाओं के लिए मची रही अफरा-तफरी, दवा मंडियों में लटके रहे ताले।
पटना, 20 मई: ऑनलाइन दवा कंपनियों (ई-फार्मेसी) की मनमानी और कॉरपोरेट घरानों द्वारा दी जा रही अनियंत्रित छूट के विरोध में बुधवार को राज्य भर के दवा व्यवसायियों ने मुकम्मल हड़ताल रखी। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के देशव्यापी आह्वान पर बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने इस बंदी का पूर्ण समर्थन किया, जिसके कारण सूबे की 40 हजार से अधिक थोक व खुदरा दवा दुकानों के शटर चौबीस घंटे के लिए डाउन रहे। अकेले राजधानी पटना में करीब 7,000 दुकानों में ताले लटके रहे, जिससे करोड़ों रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ।
इस सांकेतिक हड़ताल का सबसे सीधा और गंभीर असर अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों पर देखा गया। ‘एक्सप्रेस न्यूज़ भारत’ की ग्राउंड पड़ताल में सामने आया कि जीवन रक्षक दवाओं (लाइफ सेविंग ड्रग्स) और आवश्यक सर्जिकल सामानों के लिए तीमारदार कड़कती धूप में दर-दर भटकने को मजबूर दिखे।
अस्पतालों के बाहर पसरा सन्नाटा, मरीज बेहाल
राजधानी के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार आईजीआईएमएस (IGIMS) और पीएमसीएच (PMCH) के बाहर अमूमन चौबीसों घंटे गुलजार रहने वाली दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। सुदूर जिलों से आए मरीजों के परिजनों को जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन या आपातकालीन इलाज के लिए दवाएं लिखीं, तो वे निजी काउंटरों पर ताले देख अवाक रह गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि संकट को देखते हुए सरकारी अस्पतालों के भीतर संचालित जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी खुले रहे, जहां सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें देखी गईं। इसके अतिरिक्त, बड़े निजी अस्पतालों ने अपने इन-हाउस मेडिकल स्टोर्स को केवल भर्ती मरीजों के लिए क्रियाशील रखा।
‘नशीली दवाओं और फर्जी पर्चों की खुली मंडी बन रही ई-फार्मेसी’
हड़ताल के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। एसोसिएशन का आरोप है कि पारंपरिक दवा दुकानदारों को जहां कड़े नियमों, ड्रग लाइसेंस और डॉक्टर के मूल पर्चे (Prescription) के सत्यापन के बाद ही दवा बेचने की अनुमति होती है, वहीं ऑनलाइन कंपनियां बिना किसी पुख्ता जांच के धड़ल्ले से एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाएं और एबॉर्शन किट्स घर-घर डिलीवर कर रही हैं। इससे न केवल युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, बल्कि पीढ़ियों से इस व्यापार से जुड़े छोटे दुकानदारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। विदेशी फंडिंग के बल पर कॉरपोरेट घराने असामान प्रतियोगिता पैदा कर रहे हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी: नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी
मरीजों की बढ़ती परेशानियों के बीच राज्य स्वास्थ्य विभाग और औषधि नियंत्रण प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में नजर आया। पटना और मुजफ्फरपुर के सहायक औषधि नियंत्रकों की टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आपातकालीन सेवाओं के लिए चिन्हित किए गए दवा काउंटरों को यदि जानबूझकर बंद पाया गया, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी: दवा विक्रेता संघ ने स्पष्ट किया है कि यह केवल 24 घंटे की सांकेतिक बंदी थी, जो बुधवार रात 12 बजे समाप्त हो जाएगी। यदि केंद्र सरकार ने ई-फार्मेसी को विनियमित करने के लिए नियमों (GSR 817E) में आवश्यक संशोधन नहीं किए, तो संगठन देशव्यापी स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को बाध्य होगा।
[एक्सप्रेस न्यूज़ भारत ब्यूरो]







