नई दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी एसआरसीसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस मुद्दे पर CJP ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के युवाओं को सकारात्मक सोच और बेहतर भविष्य की उम्मीद देने की जरूरत है, न कि उन्हें अलग-अलग तरह के राजनीतिक लेबल दिए जाने चाहिए।
CJP का कहना है कि शिक्षण संस्थानों में युवाओं से जुड़े अहम मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर और भविष्य की चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार से सवाल करना या अलग विचार रखना किसी व्यक्ति को विशेष पहचान देने का आधार बन सकता है।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश की प्रगति और सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए विरोधियों की सोच पर सवाल उठाए थे।
अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक गलियारों से निकलकर युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस बयान पर सियासी प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।






