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रील स्टार’ टिप्पणी पर बवाल: IAS टीना डाबी ने दी सफाई, जानें ABVP से जुड़ा पूरा मामला….

राजस्थान कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी और वर्तमान में बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह बना है कॉलेज फीस बढ़ोतरी के विरोध के दौरान उठा एक विवाद, जिसने सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल मचा दी।मामला तब चर्चा में आया जब फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्र नेताओं को पुलिस हिरासत में लिया गया। आरोप लगा कि प्रदर्शन के दौरान जिला कलेक्टर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जिसके बाद प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की।

टीना डाबी की सफाई:

मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया”विवाद बढ़ने के बाद बाड़मेर कलेक्टर टीना डाबी की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे घटनाक्रम को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों द्वारा अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया था, इसी वजह से अस्थायी रूप से हिरासत की कार्रवाई की गई।टीना डाबी ने यह भी कहा कि किसी भी छात्र नेता पर न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही कोई कानूनी मामला बनाया गया। स्थिति सामान्य होते ही सभी को छोड़ दिया गया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह पूरा मामला शनिवार का है, जब एमबीसी कन्या महाविद्यालय की छात्राएं कॉलेज फीस में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध पर उतर आईं। छात्राओं ने कॉलेज गेट पर ताला लगाकर सड़क पर धरना शुरू कर दिया। मौके पर कॉलेज प्रशासन, पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और बातचीत के जरिए प्रदर्शन समाप्त कराने की कोशिश की।छात्राएं फीस वृद्धि तत्काल वापस लेने की मांग पर अड़ी रहीं, हालांकि प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद धरना खत्म कर दिया गया।थाने के बाहर हंगामा, फिर बातचीत से निकला समाधानधरना समाप्त होने के बाद कुछ छात्राओं और एबीवीपी कार्यकर्ताओं का जमावड़ा कोतवाली थाने के बाहर लग गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा और अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत मौके पर पहुंचे।कई घंटों तक चली बातचीत के बाद पुलिस अधीक्षक ने पूरी कार्रवाई को लेकर खेद जताया, जिसके बाद माहौल शांत हुआ।

हिरासत पर ABVP का क्या कहना है?

एबीवीपी के विभाग संगठन मंत्री (बाड़मेर-जालौर) पवन ऐचरा ने दावा किया कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में लिया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी अधिकारी के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी। अगर ऐसा होता तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती।पवन ऐचरा के मुताबिक, बाद में प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार की और सभी को छोड़ दिया गया।

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