विश्व चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भारत के पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से इनकार करने पर शाहिद अफरीदी अपना आपा खो बैठे। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था, जिससे पाकिस्तान तिलमिला गया। इसके बाद भारत ने खेल के मैदान पर भी दो टूक फैसला लेते हुए पाकिस्तान से भिड़ने से इनकार कर दिया। युवराज सिंह, सुरेश रैना, इरफान पठान और शिखर धवन जैसे खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से साफ मना कर दिया, जिसके चलते मैच रद्द करना पड़ा।
इस फैसले से भड़के अफरीदी ने प्रेस के सामने बेहद तल्ख और बेतुके बयान दे डाले। उन्होंने कहा कि अगर भारत को मैच नहीं खेलना था तो उसे टूर्नामेंट में आना ही नहीं चाहिए था। साथ ही उन्होंने शिखर धवन पर भी तंज कसा। अफरीदी बार-बार ये कहते हैं कि क्रिकेट को राजनीति से दूर रखना चाहिए, लेकिन उनके अपने बयान उसी राजनीति से प्रेरित लगते हैं। भारत के कड़े रुख और एकजुट फैसले से पाकिस्तान की बौखलाहट साफ दिख रही है, और अफरीदी का यह रवैया उसी झुंझलाहट का नतीजा है।
भारत के पाकिस्तान से न खेलने के फैसले पर अफरीदी ने ज़ोरदार नाराज़गी जताई और कहा, “अगर भारत को पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलना था, तो टूर्नामेंट में आने से पहले ही मना कर देते। अब यहां तक आकर प्रैक्टिस सेशन करना और फिर एक दिन में सब बदल देना समझ से परे है।” लेकिन अफरीदी की इस नाराज़गी की कोई ठोस बुनियाद नहीं दिखी, क्योंकि भारत ने 11 मई को ही आयोजकों को लिखित रूप में सूचित कर दिया था कि मौजूदा हालात को देखते हुए वह पाकिस्तान के खिलाफ नहीं खेलेगा। यह बात खुद शिखर धवन ने साझा की गई ईमेल के जरिए सार्वजनिक की, जिसमें यह फैसला साफ लिखा गया था।
धवन ने एक्स (Twitter) पर अपनी पोस्ट में कहा, “11 मई को जो फैसला लिया था, आज भी उस पर पूरी तरह कायम हूं। मेरे लिए मेरा देश सबसे पहले है और हमेशा रहेगा।” धवन के इस बयान पर बुरी तरह भड़के अफरीदी ने उन्हें ‘सड़ा हुआ अंडा’ कह डाला और कहा कि ऐसे लोग हर चीज को खराब कर देते हैं। उन्होंने आगे कहा, “खेल लोगों को जोड़ता है, लेकिन अगर हर चीज में राजनीति घुसा दी जाए तो हम कैसे आगे बढ़ेंगे? क्रिकेट सबसे बड़ा है – मुझसे भी बड़ा। अगर कोई भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तान से नहीं खेलना चाहता, तो बाहर बैठ जाए, लेकिन खेल को मत रोको।” अफरीदी का ये बयान साफ तौर पर उनकी बौखलाहट को दिखाता है – एक ओर वो क्रिकेट को राजनीति से दूर रखने की बात करते हैं, दूसरी ओर खुद ही उसे घसीट लाते हैं।






