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वक़्फ़ की अमानतें खतरे में! “उम्मीद पोर्टल” पर रजिस्ट्रेशन अब हर ईमान वाले की ज़िम्मेदारी…

वक़्फ़ की अमलाक के लिए हमारी ज़िम्मेदारी। खुर्शीद अहमद सिद्दीकी (ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा), देहरादून“उठ बाँध कमर, क्यों डरता है? फिर देख ख़ुदा क्या करता है। ”इस्लाम में वक़्फ़ (धार्मिक संपत्ति) एक ऐसा पवित्र और स्थायी व्यवस्था है जो मुस्लिम समाज के धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक जीवन की नींव है। परंतु दुःख की बात यह है कि आज यही वक़्फ़ की अमानतें लापरवाही, अव्यवस्था और कानूनी उलझनों की भेंट चढ़ रही हैं। भारत सरकार द्वारा “उम्मीद पोर्टल” पर वक़्फ़ संपत्तियों का पंजीकरण (Registration) कराना एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है।इसलिए वक़्फ़ के मुतवल्लियों (ट्रस्टी/ज़िम्मेदारों) को पूरे सतर्कता, गंभीरता और शरीयती एहतियात के साथ इसे पूरा करना आवश्यक है।अध्ययन और जाँच के बाद कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं, जो तुरंत ध्यान देने योग्य हैं।

1. पुनः पंजीकरण की आवश्यकता वे वक़्फ़ संपत्तियाँ जो पहले से “वामसी पोर्टल” पर दर्ज हैं, उनका “उम्मीद पोर्टल” पर दोबारा पंजीकरण अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में मुतवल्ली को निम्नलिखित विवरण भरने होते हैं —वक़्फ़ कमेटी का विवरण सर्वे रिपोर्ट राजस्व अभिलेख (Revenue Records) संपत्ति की सीमाएँ (Boundaries) जी.पी.एस. लोकेशन प्रमाणिक दस्तावेज़ इन सभी सूचनाओं को बहुत सावधानी और सटीकता के साथ भरना चाहिए, क्योंकि एक बार कोई गलती या अधूरी जानकारी चली गई तो बाद में संशोधन संभव नहीं होगा। यदि “वामसी” और “उम्मीद” पोर्टल के रिकॉर्ड में कोई भी अंतर पाया गया, तो संबंधित संपत्ति को “विवादित (Disputed Property)” की सूची में डाल दिया जाएगा।

2. सर्वे रिपोर्ट की अनुपलब्धता अनेक राज्यों के वक़्फ़ बोर्डों, विशेष रूप से उत्तराखंड वक़्फ़ बोर्ड के पास, वक़्फ़ संपत्तियों की पूरी सर्वे रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं है। इस कमी के कारण न केवल रिकॉर्ड अधूरा है, बल्कि भविष्य में कानूनी विवादों की संभ।

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