भदोही एमपी-एमएलए कोर्ट ने पैतृक संपत्ति कब्जाने और माइनिंग फर्म पर नियंत्रण के मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल, जबकि बहू रूपा मिश्रा को चार साल की सजा सुनाई। 895 दिन चली सुनवाई में आठ गवाह पेश हुए। कृष्ण मोहन तिवारी की शिकायत पर 2020 में केस दर्ज हुआ था, जिसके बाद विजय मिश्रा की मध्य प्रदेश से गिरफ्तारी हुई थी। जुलाई 2022 में बेटे विष्णु शर्मा को पुणे से गिरफ्तार किया गया था ,साथ विष्णु शर्मा पर इनाम घोषित किया गया था।
भदोही एमपी-एमएलए कोर्ट ने रिश्तेदार की पैतृक संपत्ति पर कब्जा और माइनिंग फर्म पर नियंत्रण के मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई, जबकि बहू रूपा मिश्रा को चार साल की कैद मिली। अदालत ने चारों पर कुल 5.26 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला आते ही रामलली और रूपा मिश्रा कोर्ट परिसर में भावुक होकर रोने लगीं। वहां मौजूद रूपा मिश्रा की 12 वर्षीय बेटी भी मां और दादी को रोता देख खुद को संभाल नहीं सकी और उसकी आंखों से भी आंसू निकल पड़े। फैसले के दौरान कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
पूर्व विधायक विजय मिश्रा फिलहाल आगरा जेल में, जबकि उनका बेटा विष्णु मिश्रा लखीमपुर खीरी जेल में बंद है। सुनवाई के बाद रामलली और रूपा मिश्रा को सीधे भदोही जिला कारागार भेज दिया गया। कोर्ट ने विजय मिश्रा के आपराधिक रिकॉर्ड को गंभीर मानते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया।अभियोजन के मुताबिक, पूर्व विधायक के रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी ने 4 अगस्त 2020 को गोपीगंज कोतवाली में विजय मिश्रा, उसकी पत्नी रामलली, बेटे विष्णु मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एफआईआर करने के बाद पुलिस ने जांच की और विवेचना पूरी करने के बाद 20 नवंबर 2023 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।अदालत ने बहू रूपा मिश्रा को चार साल की सजा दी। साथ ही स्पष्ट किया कि तय जुर्माना जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
रिपोर्ट – किरन






