(रिपोर्ट-नेहाल अख्तर)
(Express news bharat)
(जिला संवाददता बलिया)
रमजान महीने की शुरुआत 19 फरवरी से हो रही है। इस महीने में तरावीह की नमाज पढ़ने का विशेष महत्व माना गया है। यह नमाज इशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है और इसे पढ़ना बहुत पुण्य और सवाब का काम माना गया है।
तरावीह की नमाज रमजान में रोजाना पढ़ी जाती है। आमतौर पर मस्जिदों में इशा की नमाज के 10-15 मिनट बाद तरावीह शुरू होती है जिसमें कुल 20 रकात होती है। इस्लामिक धार्मिक मन्यताओं अनुसार इस नमाज के जरिए मुस्लिम लोग अपने परिजनों की सलामती की दुआ करते हैं। कहते हैं जो रमजान के महीने में इस खास नमाज को पढ़ता है उसे आत्मिक शांति और सवाब प्राप्त होता है। साथ ही उसके घर में बरकत रहती है। चलिए जानते हैं तरावीह की नमाज पढ़ने का सही तरीका और पूरी विधि। तरावीह की नामज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है। आम तौर पर इसे पढ़ने का समय शाम 7.30 से 8 के बीच होता है। मगर ये इसके बाद अपनी सहूलियत के हिसाब से भी पढ़ी जा सकती है।

तरावीह की नमाज का टाइम 2026
तरावीह की नामज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है। आम तौर पर इसे पढ़ने का समय शाम 7.30 से 8 के बीच होता है। मगर ये इसके बाद अपनी सहूलियत के हिसाब से भी पढ़ी जा सकती है।
तरावीह की नमाज करने का तरीका
अगर आप किसी के पीछे तरावीह पढ़ रहे हैं तो इस नमाज में कुरान की तिलावत की जाती है। वहीं अगर आप घर पर इस नमाज को अदा कर रहे हैं, तो दो-दो रकात में 30वे पारे की 10 सूरतें पढ़ी जाती हैं। चलिए जान लेते हैं इस खास नमाज को पढ़ने का तरीका…
1- सबसे पहले तरावीह नमाज की नीयत करें।
2- फिर अल्लाहु अकबर कहकर हाथ नाभि के नीचे बांध लें।
3- इसके बाद सना दुआ को पढ़ें। आऊज (आऊजो बिल्लाहे मिनश) और
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम कहें।
4- इसके बाद इमाम साहब सूरह फातिहा और कुरआन शरीफ की आयतें पढ़ेंगे, जिसे आप ध्यान से सुनें।
5 –इसके बाद रुकू करें और रुकू की तस्बीह पढ़ें।
6- फिर सजदा करें और सजदे की तस्बीह भी पढ़ें।
7 –इसके बाद इमाम साहब के साथ अल्लाहु अकबर कहते हुए खड़े हो जाएं।
8- जैसे पहली रकात की है अब दूसरी रकात भी इसी तरह करें।
9- इस तरह से आपकी दो रकात तरावीह की नमाज पूरी हो जाएगी।
10- इसी तरह दो-दो रकात करके 20 रकात इमाम साहब पूरी करेंगे।
11- हर चार रकात पूरी होने के बाद तरावीह की दुआ जरूर पढ़ें।
12- 20 रकात तरावीह पूरी होने के बाद अल्लाह से दुआ मांगें।
13- फिर 3 रकात वितर की नमाज पढ़ें।
महिलाएं कैसे पढ़ें तारावीह की नमाज
रमजान में तरावीह की नमाज पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी अदा कर सकती हैं। वे इसे अकेले या जमात के साथ पढ़ सकती हैं। तरावीह की नमाज इशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है। पहले इशा और उसकी सुन्नत व फर्ज अदा करें इसके बाद तरावीह पढ़ें। आमतौर पर 20 रकअत पढ़ी जाती हैं लेकिन आप चाहें तो 8 रकअत भी पढ़ सकती हैं।
तरावीह की दुआ हिंदी में
सुबहान ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हान ज़िल इज्ज़ति वल अज़मति वल हय्बति वल कुदरति वल किबरियाई वल जबरूत, सुबहानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमुतू सुब्बुहून कुददुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर रूह, अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन नारि या मुजीरू या मुजीरू या मुजीर’
पुरुषों के लिए तरावीह की नियत
नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, पीछे इस इमाम के मुहं मेरा कअबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर कह कर अपना हाथ बांध लेना है और फिर सना पढ़ेंगे !
महिलाओं के लिए तरावीह की नियत
नियत करती हूं मैं दो रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त इशा का, मुहं मेरा मक्का कअबा की तरफ, अल्लाहु अकबर..फिर हाथ ऊपर करके नियत बांध लेते हैं।
1- सूरह फिल- अलम तरा कैफा फाअला रब्बुका बियस हाबिल फील। अलम यज़अल कै दाहुम फी तजलील। वा अर्सला अलैहिम तैरन अबाबील। तर्मीहिम बिही जारतिम में सिज्जील। फजा अलाहुम का सिफिम माकूल।
2-सूरह नास- कुल अऊजू बि रब्बिन नासि. मलिकिन नासि. इला हिन्नासि,मिन श र्रि ल वस् वासिल खन्ना सि,अल्लज़ी युवस विसु फी सुदु रिन्नासी,मिनल जिन्नति वन्नास.
3-सुरह कुरैश- लि इलाफि कुरैश। इलाफिहिम रिहलतश शिताई वस सैफ। फल यअबुदू रब्बा हाज़ल बैत। अल्लज़ी अत अमाहुम मिन जुआ। व आमना हुम मिन खौफ।
4-सुरह कुरैश- लि इलाफि कुरैश। इलाफिहिम रिहलतश शिताई वस सैफ। फल यअबुदू रब्बा हाज़ल बैत। अल्लज़ी अत अमाहुम मिन जुआ। व आमना हुम मिन खौफ।
5-सूरह कौसर- इन्ना अअतैना कल कौसर, फसल लि लि रब्बि क वन हर, इन न शानि अ क हुवल अबतर।
6-सूरह काफिरून- कुल या अय्युहल काफ़िरून। ला अबदु माँ ता अबुदन। वाला अन्तुम आबिदु न माँ आबुद। वला अना आ बिदुम माँ अब ततुम। वला अन्तुम आबिदु न माँ आ बू दू। ला कम दिनु कम व लिय दीन।
7-सूरह नस्र- इज़ा ज अ नसरुल्लाहि वल फ़तहु। व र अै तन ना स यदखुलू न फी दीनिल्लाहि अफ़वाजा। फ़सब्बिह बिहम्दि रब्बि क वस्तग़ फ़िर हू इन्नहु का न तव्वाबा।सूरह लहब- तब्बत यदा अबी ल हबिव व तब्ब। मा अग्ना अनहु मालुहू वमा कसब। सयस्ला नारन ज़ा त ल ह बिव। वम र अतुहू हम्मा लतल हतब। फी जीदिहा हब्लुम मिन मसद।
8-सूरह लहब – तब्बत यदा अबी ल हबिव व तब्ब। मा अग्ना अनहु मालुहू वमा कसब। सयस्ला नारन ज़ा त ल ह बिव। वम र अतुहू हम्मा लतल हतब। फी जीदिहा हब्लुम मिन मसद।
9-सूरह इखलास- कुल हुवल्लाहु अहद अल्लाहुस्समद लम यलिद व् लम यूलद वलम यकुल्लहू कुफुवन अहद
10-सूरह फलक- कुल अऊजू बि रब्बिल फलक। मिन शर्रि मां खलक। वमिन शर्रि ग़ासिकीन इज़ा वकब। व् मिन शर्रिन नफ्फा साति फिल उकद। व् मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।
तरावीह की नमाज की फजीलत
रमजान में पढ़ी जाने वाली तरावीह की नमाज बहुत बड़ी फजीलत रखती है। हदीसों के अनुसार, जो व्यक्ति ईमान और सवाब की नीयत से ये नमाज करता है, उसके पिछले गुनाह माफ हो जाते हैं। इस नमाज को करने से दिल को सुकून मिलता है और इंसान अल्लाह के करीब होता है। ये नमाज रमजान की बरकतों को हासिल करने और गुनाहों की मांफी का खास जरिया मानी जाती है। अल्लाह तआला तरावीह पढ़ने वाले लोगों पर अपनी रहमत बरसाता है।
क्या तरावीह की नमाज़ पढ़ना फर्ज है?
यह रमजान के महीने में पढ़ी जाने वाली सुन्नत-ए-मुअक्कदा नमाज है, यानी इसे पढ़ना बहुत सवाब का काम होता है। लेकिन इसे पढ़ना जरूरी नहीं माना गया है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Express news bharat टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)






