ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान का विवरण आया सामने, दोनों फर्मों के बिलों का प्रारूप और मोबाइल नंबर एक होने का दावा; सामग्री की खरीद और आपूर्ति की जांच की मांग
रिपोर्ट: अखिलेश गौतम
सीतापुर। विकास खंड पिसावां की ग्राम पंचायत गौरासी कला में सरकारी धनराशि से की गई खरीद और विभिन्न फर्मों को हुए भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्राम पंचायत में प्रधान के सगे भाई की फर्म और उनके करीबी बताए जा रहे व्यक्ति की फर्म के नाम पर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दोनों फर्मों को किए गए भुगतान, बिलों के प्रारूप और उन पर दर्ज मोबाइल नंबर को लेकर पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ग्राम प्रधान के सगे भाई मान सिंह राठौर की फर्म श्री तिरुपति बालाजी ट्रेडर्स को वित्तीय वर्ष 2025-26 में 49,625 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, प्रधान के करीबी बताए जा रहे मुनेन्द्र कुमार की फर्म आर.एस. इंटरप्राइजेज को 6 दिसंबर 2024 से अब तक 33 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन भुगतानों का विवरण ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज होने की बात कही जा रही है।
दो फर्मों के बिलों में समानता, जांच की जरूरत
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु दोनों फर्मों के बिलों का प्रारूप एक जैसा होना और उन पर एक ही मोबाइल नंबर दर्ज होना बताया जा रहा है। यदि दस्तावेजों की जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि दोनों फर्मों के बिल किस प्रकार तैयार किए गए और खरीद की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं।
इसके अलावा, बिलों पर दर्ज पतों पर दुकान संचालित नहीं होने की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक सत्यापन और भौतिक निरीक्षण के निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में संबंधित फर्मों के पते, उनके व्यावसायिक संचालन और ग्राम पंचायत को सामग्री की वास्तविक आपूर्ति की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्या खरीदी गई सामग्री की हुई वास्तविक आपूर्ति?
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए सामग्री की खरीद पर सरकारी धन खर्च किया जाता है। इसलिए भुगतान के साथ-साथ खरीद संबंधी बिल, सामग्री प्राप्ति के अभिलेख, स्टॉक रजिस्टर, भुगतान की स्वीकृति और संबंधित विकास कार्यों में सामग्री के इस्तेमाल का सत्यापन भी जरूरी है।
गौरासी कला पंचायत के मामले में भी यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित फर्मों से किस-किस प्रकार की सामग्री खरीदी गई, उसकी मात्रा और दर क्या थी, सामग्री पंचायत को कब उपलब्ध कराई गई तथा भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ।
यदि अभिलेखों और मौके की जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों की भूमिका निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि निष्पक्ष जांच हुई तो बड़ी कार्यवाही सकती है
उच्चस्तरीय जांच से सामने आ सकता है पूरा मामला
मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर दर्ज भुगतान का मिलान मूल बिलों, बैंक भुगतान विवरण, खरीद रजिस्टर और सामग्री आपूर्ति के प्रमाणों से कराया जाना चाहिए। साथ ही, दोनों फर्मों के बिलों पर दर्ज मोबाइल नंबर और पतों का भी सत्यापन किया जाना चाहिए।
यदि जांच में प्रधान के रिश्तेदारों या करीबी व्यक्तियों से संबंधित फर्मों को भुगतान किए जाने में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल, इस मामले में संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन कर भुगतान और खरीद प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।







