संभल जिले में चुनाव ड्यूटी पर तैनात एक शिक्षक-BLO की अचानक मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, बीती रात वे लगातार फील्ड में काम करने के बाद बेहद थके हुए थे और आराम करने के लिए कमरे में गए। सुबह जब दरवाजा देर तक नहीं खुला, तो साथियों ने कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा तोड़ा गया तो वे बेसुध हालत में मिले। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से वे लगातार अतिरिक्त ड्यूटी निभा रहे थे। ब्लॉक स्तर पर डेटा अपडेट, घर-घर सत्यापन और दस्तावेज़ जांच का दबाव काफी बढ़ गया था। परिजनों का आरोप है कि अत्यधिक थकान और तनाव ने उनकी जान ले ली।
देवरिया में भावनाओं का बांध टूटा
इसी बीच देवरिया से भी एक दर्दनाक दृश्य सामने आया। मतदाता सूची में संशोधन और फील्ड वर्क की समीक्षा बैठक के दौरान अचानक एक लेखपाल रो पड़ा। वह बोला—
“मैडम, हम लोग भी इंसान हैं… दिन-रात दौड़ते-दौड़ते कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। ऐसी नौकरी पर कभी-कभी खुद पर ही दुख होता है।”उसकी बात सुनकर बैठक ले रही SDM भी भावुक हो गईं। उन्होंने सभी कर्मचारियों को कुछ मिनटों का ब्रेक दिया और कहा कि बिना सोच-समझे लगातार दबाव डालना किसी की जान ले सकता है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि फील्ड स्टाफ की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
सरकारी मशीनरी पर सवाल
लगातार बढ़ता प्रशासनिक दबाव, समय-सीमा को लेकर ऊपर से आने वाली हड़बड़ी और फील्ड कर्मचारियों के काम की वास्तविक परिस्थितियाँ अब गंभीर चिंता का विषय बन रही हैं।
सरकारी कर्मचारी संगठन का कहना है कि:
कर्मियों से 12-14 घंटे तक लगातार काम करवाया जा रहा है
पर्याप्त आराम और मेडिकल सुविधा नहीं
छोटे कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा दबाव
संभल और देवरिया की घटनाएँ दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों के सामने हालात कितने कठिन हैं।






