उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवादित बयान सामने आया है। शंकराचार्य ने एक कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया कि काशी में विकास कार्यों के नाम पर “हजारों मंदिर तोड़े गए” और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर “मौन धारण” किया। उन्होंने आगे कहा कि “सत्ता के लिए मंदिर तुड़वाए गए, यह कदापि हिंदू होने का लक्षण नहीं है। मैं ऐसे व्यक्ति को अकबर और औरंगजेब की श्रेणी में रखता हूं।”
शंकराचार्य के इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है, जहां लोग इस विषय पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। वहीं भाजपा समर्थकों ने शंकराचार्य के आरोपों को निराधार बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने इस बयान को योगी सरकार पर निशाना साधने के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया है।
हालांकि इस बयान के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक काशी कॉरिडोर के निर्माण के दौरान कई प्राचीन मंदिरों को हटाए जाने की शिकायतें पहले भी उठ चुकी हैं। शंकराचार्य ने इसी मुद्दे को आधार बनाते हुए योगी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।
धार्मिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के बयान आने वाले समय में हिंदू धार्मिक संस्थानों और सरकार के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि शंकराचार्य के इस बयान का राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर क्या असर पड़ता है।






