रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के उमरिया गांव में एक भावनात्मक और जोशीले संबोधन में भारत की तरक्की और आत्मनिर्भरता की कहानी सुनाई। उन्होंने रेल कोच फैक्ट्री की आधारशिला रखी और मंच से दुनिया को सीधा संदेश दिया—भारत अब किसी से कम नहीं।
बिना किसी का नाम लिए, उन्होंने अमेरिकी राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा, “सबके बॉस तो हम हैं,” और बताया कि कुछ शक्तियाँ भारत की तेज़ प्रगति से असहज हैं। उन्होंने यह चिंता जताई कि कुछ लोग चाहते हैं कि भारत में बने सामान दुनिया में प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएँ—but भारत अब रुकने वाला नहीं है।
अपने भाषण में उन्होंने आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की ताकत पर भी रोशनी डाली, जहाँ भारत अब 24,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रक्षा सामान निर्यात कर रहा है—एक ऐसा मुकाम जो कुछ साल पहले सपना लगता था।
आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने एक सजीव उदाहरण दिया—हनुमान और लंका का। राजनाथ ने बताया कि भारत किसी का धर्म नहीं पूछता, बल्कि कर्म देखकर जवाब देता है। यह वही नया भारत है—जो विनम्र भी है, लेकिन जब ज़रूरत हो तो जवाब देना भी जानता है।
उनका यह भाषण सिर्फ आंकड़े नहीं, आत्मगौरव, आत्मनिर्भरता और भारत के उज्ज्वल भविष्य की झलक था।






