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राजस्थान में एआई तकनीक से सशक्त होगा कृषि क्षेत्र, किसानों को मिलेंगी आधुनिक एवं डेटा आधारित सेवाएं

झालावाड़ से ब्यूरो चीफ आसिफ शेरवानी की रिपोर्ट

कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए 38 संगठनों के साथ एमओयू, एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना तथा किसान आईडी के शत-प्रतिशत लक्ष्य की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि

झालावाड़, 12 अक्टूबर। राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा खेती की लागत एवं जोखिम कम करने के उद्देश्य से विभिन्न नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में पंत कृषि भवन, जयपुर में वाधवानी इंस्टीट्यूट फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञों द्वारा प्रदेश के 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को ।प् के उपयोग एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान कृषि अधिकारियों को बताया गया कि ।प् तकनीक के माध्यम से मौसम आधारित कृषि सलाह, कीट एवं रोगों की समय पर पहचान, फसल उत्पादन का पूर्वानुमान, सिंचाई एवं उर्वरक प्रबंधन तथा बाजार संबंधी जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती है। इससे कृषि कार्यों में सटीकता बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा किसानों की आय में वृद्धि की संभावनाओं को बल मिलेगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में तकनीक से पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) झालावाड़ डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रिमोट सेंसिंग, ड्रोन एवं इमेज एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के उपयोग से फसल क्षति के आकलन को अधिक वैज्ञानिक एवं पारदर्शी बनाया जा सकता है। इसके साथ ही राज किसान पोर्टल को एआई एवं डेटा आधारित तकनीकों से अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी उपलब्ध हो सके।

38 संगठनों के साथ एमओयू, कृषि नवाचारों एवं प्राकृतिक खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि तथा आधुनिक तकनीकों के प्रसार को गति देने के उद्देश्य से 38 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (डवन्) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, तकनीकी मार्गदर्शन, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना से कृषि योजनाओं का होगा बेहतर एकीकरण

राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है तथा कृषि आयुक्त को एग्रीस्टैक आयुक्तालय के आयुक्त के रूप में नामित किया गया है। एग्रीस्टैक डेटा के पीआईआई के माध्यम से विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों एवं योजनाओं का एकीकरण किया जा रहा है। इससे उर्वरक वितरण, भूमि क्षेत्रफल के आधार पर उर्वरक की आवश्यकता के आकलन तथा लक्षित वितरण में सहायता मिलेगी। साथ ही ड्रोन तकनीक के माध्यम से नैनो लिक्विड यूरिया वितरण में भी सही लाभार्थियों के चयन में मदद मिलेगी।

किसान रजिस्ट्री में राजस्थान की ऐतिहासिक उपलब्धि, 90.19 लाख किसान आईडी का लक्ष्य शत-प्रतिशत अर्जित

राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 90.19 लाख किसान आईडी के लक्ष्य को राजस्थान ने शत-प्रतिशत हासिल कर महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। इस उपलब्धि के साथ राजस्थान किसान आईडी का निर्धारित लक्ष्य पूरा करने वाला उत्तर भारत का पहला तथा देश का छठा राज्य बन गया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि राज्य में किसान आईडी को केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे विभिन्न महत्वपूर्ण कृषि व्यवस्थाओं एवं योजनाओं से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया गया है।

राज्य में किसान आईडी का अन्य डेटाबेस के साथ सिंक्रोनाइजेशन पूरा कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त किसान आईडी को पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, उर्वरक वितरण प्रणाली तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है। इससे किसानों को विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।

किसान आईडी से किसानों को मिलेंगे प्रत्यक्ष लाभ

डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि किसान आईडी के माध्यम से किसानों की प्रमाणित डिजिटल पहचान विकसित होने से भविष्य में विभिन्न योजनाओं के लिए बार-बार समान दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम होगी। इससे पात्र लाभार्थियों की पहचान तेज होगी तथा सरकारी सेवाओं को अधिक लक्षित बनाया जा सकेगा।

किसान आईडी, भूमि रिकॉर्ड एवं क्रॉप रजिस्ट्री जैसी व्यवस्थाओं के आपसी एकीकरण से किसानों की वास्तविक भूमि एवं फसल संबंधी जानकारी के आधार पर फसल बीमा, उर्वरक वितरण, पीएम-किसान, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद तथा अन्य कृषि योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने की आधारभूत क्षमता विकसित होगी। इन पहलों से राजस्थान में कृषि क्षेत्र को तकनीक-सक्षम, पारदर्शी एवं किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
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