Home / Breaking News / झारखंड छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी की सोरेन सरकार को दो टूक,’छात्रों पर बल प्रयोग ग़लत, तुरंत सुनें बात…..

झारखंड छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी की सोरेन सरकार को दो टूक,’छात्रों पर बल प्रयोग ग़लत, तुरंत सुनें बात…..

रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का विरोध लगातार चर्चा में है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को अनुचित बताते हुए राज्य सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि प्रदर्शनकारियों की समस्याओं को सुना जाए और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशा जाए।

भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों में नाराजगी

झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष देखने को मिल रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर छात्र अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन मामलों में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने सरकार से की बातचीत की अपील

कांग्रेस नेता ने अपने बयान में छात्रों की मांगों को सुनने पर जोर दिया। उनका कहना है कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से छात्रों की शिकायतों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और बातचीत के जरिए गतिरोध दूर करने की दिशा में क्या पहल होती है।

क्या है छात्रों की मांग?

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों पर कार्रवाई जैसी मांगें उठा रहे हैं। छात्रों का जोर इस बात पर है कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के हितों और निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

छात्र आंदोलन और सरकार के बीच संवाद से ही इस विवाद का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।

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