तेल अवीव, 18 जुलाई — इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार एक बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रही है। बुधवार को उनकी गठबंधन सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब एक प्रमुख सहयोगी दल ‘शास पार्टी’ ने अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद नेतन्याहू के पास संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं बचा, जिससे उनकी सरकार की स्थिरता पर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि, शास पार्टी के नेता ने यह स्पष्ट किया है कि उनका इरादा फिलहाल सरकार को गिराने का नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी नाराज़गी कुछ नीतिगत मुद्दों को लेकर है, और वह इस पर बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं। इसके बावजूद नेतन्याहू सरकार के लिए यह एक राजनीतिक चेतावनी से कम नहीं है।
गौरतलब है कि नेतन्याहू पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं — घरेलू स्तर पर आर्थिक असंतोष, न्यायिक सुधारों को लेकर विरोध, और गाजा पट्टी में जारी संघर्ष ने उनकी लोकप्रियता को प्रभावित किया है। अब इस राजनीतिक दरार ने सरकार की वैधता और स्थायित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो इजरायल को एक बार फिर सामयिक चुनावों का सामना करना पड़ सकता है। यह नेतन्याहू के लिए एक और राजनीतिक परीक्षा होगी, जो पहले ही कई विवादों के बावजूद सत्ता में बने रहने में कामयाब रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू इस संकट से कैसे निपटते हैं — क्या वे सहयोगी दलों को फिर से मना पाएंगे, या इजरायल एक और राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है?






