लोकेशन – समस्तीपुर
रिपोर्ट – नवनीत कुमार झा
एसपी-डीआईजी ने संभाली कमान, फिर भी सवाल कायम—कब पकड़े जाएंगे बुजुर्ग दंपती के हत्यारे?
समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर थाना क्षेत्र के भरपुरा पटपारा पंचायत अंतर्गत भरपुरा वार्ड संख्या-11 में 70 वर्षीय बुजुर्ग दंपती की धारदार हथियार से निर्मम हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया है। जिस घर में उम्र के इस पड़ाव पर पति-पत्नी अपना जीवन शांतिपूर्वक गुजार रहे थे, वही घर अचानक दो शवों की मौजूदगी और चीख-पुकार से मातम में बदल गया। घटना की खबर जैसे-जैसे आसपास के लोगों तक पहुंची, बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए।
इस वारदात ने सिर्फ दो जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि इलाके के लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसी क्या वजह थी कि अपराधियों ने बुजुर्ग दंपती को निशाना बनाया? क्या हत्या के पीछे लूट, पुरानी रंजिश, संपत्ति विवाद या कोई व्यक्तिगत कारण था? या अपराधियों का मकसद कुछ और था? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
घटनास्थल पर जांच की लंबी कवायद
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम, टेक्निकल टीम और डॉग स्क्वायड को भी जांच में लगाया गया। घटनास्थल से संभावित साक्ष्य जुटाने, आसपास की परिस्थितियों को समझने और घटना की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया गया।
पुलिस के लिए इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें वैज्ञानिक जांच से जोड़ना है। अपराधियों ने किस रास्ते से प्रवेश किया, घटना के बाद किस दिशा में निकले, घटनास्थल पर कोई फिंगरप्रिंट, जैविक साक्ष्य या अन्य महत्वपूर्ण सुराग छूटा है या नहीं—इन तमाम बिंदुओं की जांच निर्णायक साबित हो सकती है।
डॉग स्क्वायड भी मौके पर पहुंचा, लेकिन ग्रामीणों के बीच चर्चा रही कि खोजी कुत्ते से कोई ऐसा स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया, जिससे जांच को तत्काल दिशा मिल सके। हालांकि डॉग स्क्वायड से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलना अपने आप में जांच की विफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिक साक्ष्य, सीसीटीवी, मोबाइल तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल और संदिग्धों से पूछताछ जैसे कई माध्यमों को एक साथ जोड़ना इस तरह के मामले में ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
एसपी और डीआईजी ने संभाली कमान
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह और मिथिला क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक मनोज तिवारी ने स्वयं घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की निगरानी की।
वरीय अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, परिजनों से बातचीत की और ग्रामीणों से भी घटना से संबंधित जानकारी जुटाई। जांच में हर संभावित पहलू को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने संदेह के आधार पर पांच लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। हालांकि हिरासत में लिया जाना अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। अब पुलिस की चुनौती इन लोगों से पूछताछ के जरिए घटना से जुड़े वास्तविक तथ्यों तक पहुंचने की है।
सिर्फ पूछताछ नहीं, सुराग को सबूत में बदलना चुनौती
किसी भी सनसनीखेज हत्याकांड में शुरुआती दौर में कई लोगों पर संदेह हो सकता है। लेकिन पुलिस के सामने असली चुनौती संदिग्ध व्यक्ति को आरोपी और आरोपी को दोषी साबित करने योग्य साक्ष्य तक पहुंचने की होती है।
इस मामले में मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे, मृतकों और संदिग्धों के बीच संबंध, घटना से पहले और बाद की गतिविधियां, आर्थिक या पारिवारिक विवाद तथा घटनास्थल से प्राप्त वैज्ञानिक साक्ष्य जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
अगर पुलिस इन सभी कड़ियों को आपस में जोड़ पाती है तो हत्याकांड के पीछे छिपी पूरी कहानी सामने आ सकती है।लेकिन ग्रामीण परिवेश में अभी भी बहुत से ऐसे जगह हैं जहां पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए हैं।जिससे पुलिस के लिए वारदात का उद्भेदन और भी चुनौती पूर्ण हो सकता है।
विभूतिपुर में लगातार आपराधिक घटनाएं चिंता का विषय
भरपुरा पटपारा की घटना को केवल एक अलग-थलग वारदात के तौर पर देखना स्थानीय लोगों के लिए आसान नहीं है। विभूतिपुर थाना क्षेत्र में हाल के दिनों में हत्या और गोलीकांड की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।
विभूतिपुर में यह डबल मर्डर का मामला कोई नया नहीं है । वर्चस्व और स्वार्थ सिद्धि को लेकर यहां इस तरह की घटनाएं अमूमन देखने को मिलती है।वहीं टभका में सीएसपी लूट के दौरान हुई गोलीबारी और डबल मर्डर की घटना ने भी क्षेत्र में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को लेकर सवाल खड़े किए थे। यह वारदात राज ही रह गया। आज तक इस राज पर से पर्दा नहीं उठा।
लगातार घटनाओं के बीच अब स्थानीय लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर अपराधियों में पुलिस का कितना भय बचा है और अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस की रणनीति कितनी प्रभावी साबित हो रही है।
क्या पुराने मामलों से अलग होगी इस बार की जांच?
भरपुरा डबल मर्डर ने पुलिस के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है—क्या इस मामले का उद्भेदन समय रहते होगा?
डीआईजी मनोज तिवारी ने मीडिया के सामने मामले के शीघ्र उद्भेदन की बात कही है। एसपी की निगरानी और वरीय अधिकारियों की सक्रियता से लोगों की उम्मीद भी बढ़ी है। लेकिन पुलिस के सामने सिर्फ अपराधियों तक पहुंचना ही चुनौती नहीं है, बल्कि ऐसा ठोस साक्ष्य जुटाना भी जरूरी है जो अदालत में मामले को मजबूती दे सके।
यही वजह है कि इस हत्याकांड में पुलिस की हर कार्रवाई अब लोगों की नजर में है।
ग्रामीणों के मन में सबसे बड़ा सवाल—अपराधी कौन?
घटना के बाद से पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। 70 वर्ष की उम्र में बुजुर्ग दंपती की हत्या ने ग्रामीणों को भीतर तक झकझोर दिया है। लोग चाहते हैं कि पुलिस जल्द से जल्द हत्या की वजह और हत्यारों का पता लगाए।
लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि हत्यारा कौन है। सवाल यह भी है कि अपराधियों ने बुजुर्ग दंपती को ही क्यों चुना? क्या वे पहले से उनके बारे में जानते थे? क्या घटना सुनियोजित थी? क्या अपराधियों ने घर की गतिविधियों की पहले से रेकी की थी? घटना के बाद वे किस रास्ते से भागे? क्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने उनकी मदद की?
इन सवालों के जवाब ही इस हत्याकांड की पूरी तस्वीर सामने ला सकते हैं।
अब दावे नहीं, परिणाम का इंतजार
विभूतिपुर के लोगों ने पुलिस की जांच देख ली है। एफएसएल से लेकर टेक्निकल टीम और डॉग स्क्वायड तक की कार्रवाई हो चुकी है। एसपी और डीआईजी घटनास्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। संदिग्धों से पूछताछ भी चल रही है।
अब लोगों की नजर सिर्फ एक चीज पर है—नतीजे पर।
क्या पुलिस इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाकर हत्यारों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाएगी? क्या इस घटना का उद्भेदन पुराने लंबित मामलों के लिए भी नई दिशा तैयार करेगा? या फिर कुछ दिनों बाद यह मामला भी सुर्खियों से निकलकर जांच की फाइलों में सिमट जाएगा? क्या पुलिस अंधेरे घर में तीर मार रही है।
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
फिलहाल भरपुरा के उस घर में पसरा सन्नाटा सिर्फ दो मौतों की कहानी नहीं कह रहा, बल्कि पुलिस व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल भी खड़ा कर रहा है—क्या अपराधियों से पहले पुलिस पहुंचेगी, या अपराधी हर बार पुलिस से एक कदम आगे निकलते रहेंगे?












