प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे हैं, और इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजरें हैं। वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन में होंगे, लेकिन उनकी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर विशेष दिलचस्पी है। इस वार्ता में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों और पूर्वी लद्दाख में हुए तनाव के बाद रिश्तों को सुधारने की दिशा पर चर्चा हो सकती है। खासकर, जब अमेरिका और भारत के रिश्तों में टैरिफ नीतियों के कारण कुछ दरारें आई हैं, तो इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा से पहले कहा था कि भारत और चीन दोनों देशों के लिए मिलकर विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाना जरूरी है। उनका मानना है कि इस तरह के सौहार्दपूर्ण संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति में योगदान दे सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों ने तनाव को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, खासकर लद्दाख में सैनिकों की वापसी के बाद। पीएम मोदी की ये यात्रा इसलिए भी अहम है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिशें अब न सिर्फ कागजों पर, बल्कि व्यवहारिक रूप में भी दिख रही हैं।






