एनसीईआरटी ने हाल ही में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए भारत-पाकिस्तान बंटवारे पर दो खास मॉड्यूल जारी किए हैं, जिनमें जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को इस दर्दनाक ऐतिहासिक घटना का ज़िम्मेदार बताया गया है। इसमें बंटवारे को सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि एक दिल दहला देने वाली मानवीय त्रासदी के रूप में दिखाया गया है—जिसने करीब 1.5 करोड़ लोगों को उजाड़ा और लाखों की जान ले ली। मॉड्यूल सामने आते ही सियासी पारा चढ़ गया। कांग्रेस ने इसे इतिहास को तोड़-मरोड़ने की कोशिश बताया, तो बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि बच्चों को सच जानने से कोई रोक नहीं सकता।
इस बहस के बीच, इतिहासकारों और शिक्षाविदों ने भी अपनी बात रखी। ICHR के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये घटना सामान्य नहीं, बल्कि आज़ादी के दौर की सबसे गहरी चोटों में से एक थी—कुछ ऐसा जिसकी कल्पना तक आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों ने नहीं की थी। एनसीईआरटी का कहना है कि ये मॉड्यूल बच्चों को इतिहास की जटिल सच्चाइयों से रूबरू कराने के लिए तैयार किए गए हैं, ताकि वे सिर्फ किताबों के पन्नों तक सीमित न रहें, बल्कि उस दर्द और संघर्ष को भी समझ सकें जिसने देश की तकदीर बदल दी। कांग्रेस इसे एकतरफा मान रही है, जबकि बीजेपी और कई इतिहासकार इसे ‘सच को सामने लाने की ज़रूरत’ बता रहे हैं।






