एसएसपी बरेली द्वारा मामले पर निर्देशन किया जा रहा था।
क्षेत्राधिकारी नगर प्रथम श्री आशुतोष शिवम द्वारा निकट पर्यवेक्षण किया जा रहा था।
सरकार की तरफ से बहस की AGA श्री नितेश श्रीवास्तव नें जिनके द्वारा केस डायरी के साक्ष्यों का तर्क के साथ प्रस्तुतीकरण माननीय न्यायालय के समक्ष किया गया।
विवेचक संजय कुमार धीर द्वारा केस डायरी में माननीय न्यायलय में यह साबित किया गया हैं की 19.09.25 को फरीदापुर में दिनाँक 26.09.25 के दंगे की पूर्व योजना बनी थी, हथियार लाये गए थे, अपराधी दंगे में शामिल किये गए थे, लोगों को उकसाया गया था, भीड़ इकठ्ठा करने के लिए आईएमसी के पदाधिकारी लगे थे, जिसमे मौलाना की भूमिका मुख्य षड़यंत्रकारी की थी। इसके लिए घटना से पूर्व और पश्चात् के साक्ष्य संकलित किये गए। वीडियो प्रस्तुत की गई। साक्ष्य संकलन कराने में उप निरीक्षक श्री त्रिवेंद्र कुमार भी भूमिका रही।
डिफेंस काउंसिल ने तर्क किया कि अभियुक्त अभियुक्त मौलाना तौकीर राजा इस मुकदमे में नामजद नहीं है तथा इसका नाम प्रकाश में आया है इसके अलावा इस मामले में कई अभियुक्तों की जमानत और एंटीसिपेटरी बैल मनाo उच्च न्यायालय द्वारा स्वीकार की जा चुकी हैं इसलिए मौलाना तौकीर को भी जमानत दे दी जाए अभियुक्त मौलाना तौकीर कोई षड्यंत्रकारी नहीं है।
सरकार की तरफ तरफ से अपर शासकीय अधिवक्ता श्री नितेश श्रीवास्तव द्वारा तर्क प्रतिवाद किया गया कि मौलाना तौकीर मास्टरमाइंड षड्यंत्रकारी है जिसके द्वारा दिनांक 19 9 25 से लेकर 269 25 तक के घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई गई है तथा इसके बाद धन्यवाद ज्ञापन करने के लिए एक वीडियो जारी की गई थी इससे साबित होता है कि मौलाना तोकीर रजा ही मुख्य षड्यंत्रकारी था मुकदमे की प्रथम सूचना रिपोर्ट में नाम जद नहीं है किंतु FiR के अंदर के कंटेंट में इसका नाम आया है इसलिए इसको जमानत नहीं दी जानी चाहिए। माननीय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों के तर्क सुनकर मौलाना तौकीर राजा की जमानत को खारिज कर दिया।





