बरेली:
शहर को स्वच्छ बनाने और कचरे से खाद तैयार करने के नाम पर जनता के पैसों की बंदरबांट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। डेलापीर, सीआई पार्क और स्वाले नगर सहित कई प्रमुख इलाकों में कचरे से खाद बनाने वाले कंपोस्टर पिछले दो वर्षों से पूरी तरह ठप पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद ऑपरेटरों और हेल्परों के नाम पर भुगतान लगातार जारी रखा गया।
सवाल यह उठता है कि जब मशीनें दो साल से बंद हैं, तो ऑपरेटर और हेल्पर वहां क्या कर रहे थे? उनकी हाजिरी का सत्यापन किसने और कैसे किया? क्या बंद मशीनों से कागजों पर खाद का उत्पादन दिखाकर बिल पास किए जा रहे थे?
मामले की सुगबुगाहट तेज होते ही नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इस पूरे खेल में नगर निगम के नोडल अधिकारी राजीव राठी और पीपीपी सिक्योरिटी कंपनी के मालिक यूनुस खान की भूमिका सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ गई है। सवाल ये है कि क्या उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से ये सब हो रहा था ।
जांच में अब मशीनों के भौतिक सत्यापन, खाद उत्पादन के फर्जी आंकड़ों, ठेकेदार के बिलों और कर्मचारियों की उपस्थिति के दावों की पड़ताल की जाएगी। शहर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच महज खानापूरी बनकर रह जाएगी या फिर जनता के पैसे पर डाका डालने वाले इन जिम्मेदार चेहरों पर सख्त कार्रवाई होगी।






