इज्जतनगर क्षेत्र में रात के समय JCB से मिट्टी खनन का वीडियो वायरल होने का दावा, डीएम अविनाश सिंह के निर्देशों पर कितना हुआ अमल? खनन विभाग की निगरानी, अधिकारियों की जवाबदेही और कथित संरक्षण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज।*
बरेली। जिले में अवैध मिट्टी खनन पर अंकुश लगाने के प्रशासनिक दावों के बीच थाना इज्जतनगर क्षेत्र में रात के अंधेरे में कथित खनन का मामला खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल बताए जा रहे वीडियो में रात के समय JCB मशीन से मिट्टी की खुदाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो की तारीख, सटीक स्थान और खनन की वैधता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है कि आखिर डीएम की जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स कहां है?
डीएम की खनन टास्क फोर्स आखिर कर क्या रही है?
जानकारी के अनुसार, 18 जून 2026 को जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण लगाने तथा नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए थे।
इसके साथ ही खनन से जुड़े दस्तावेजों, ई-रवन्ना और परिवहन की जांच पर भी जोर दिया गया था।
अब सवाल उठता है कि यदि इज्जतनगर क्षेत्र में नियमों के विरुद्ध रात के समय खनन हो रहा है, तो टास्क फोर्स की निगरानी में ऐसी गतिविधियां कैसे जारी रह सकती हैं? क्या टीम ने संबंधित क्षेत्र में निरीक्षण किया? क्या रात्रिकालीन जांच अभियान चलाया गया? इन सवालों पर प्रशासन का जवाब सामने आना आवश्यक है।
खनन अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल
कथित वायरल वीडियो ने जिला खनन अधिकारी की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सवाल है कि क्या संबंधित स्थान पर मिट्टी खनन के लिए वैध अनुमति जारी की गई थी? यदि अनुमति थी, तो कितनी मात्रा में और किन शर्तों पर खनन स्वीकृत था?
यदि बिना अनुमति या परमिट की शर्तों के उल्लंघन में खनन हुआ है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
विभागीय संरक्षण और मिलीभगत की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अभी कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए खनन अधिकारी की भूमिका पर निष्कर्ष निकालने से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
क्या केवल कागजों पर चल रही निगरानी?
जिला प्रशासन समय-समय पर अवैध खनन रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी करता रहा है। इसके बावजूद कथित खनन का वीडियो सामने आने से निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या खनन विभाग के अधिकारी रात के समय संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण करते हैं? क्या खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और मिट्टी ढोने वाले वाहनों के दस्तावेज जांचे जाते हैं? क्या जिला स्तरीय टास्क फोर्स के निरीक्षण और कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है।
उत्तर प्रदेश उपखनिज नियमावली के तहत जांच जरूरी
उत्तर प्रदेश उपखनिज (परिहार) नियमावली, 2021 के अंतर्गत लागू खनिजों का खनन वैध अनुमति और निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जाना आवश्यक है। हालांकि साधारण मिट्टी की कुछ गतिविधियों के लिए नियमों में अपवाद भी मौजूद हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल रात में खनन होने से किसी गतिविधि को स्वतः अवैध नहीं माना जा सकता। इसकी वैधता निर्धारित करने के लिए परमिट, स्वीकृत मात्रा, भूमि की स्थिति और लागू शर्तों की जांच आवश्यक है।
पहले भी सामने आ चुके हैं खनन के मामले
बरेली में अवैध मिट्टी खनन से जुड़े मामले पहले भी चर्चा में रहे हैं। जून 2026 में नवाबगंज क्षेत्र में कथित अवैध खनन के मामले में दो डंपर और एक JCB जब्त किए जाने की खबर सामने आई थी। मीरगंज क्षेत्र में भी खनन संबंधी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
ऐसे में इज्जतनगर के कथित मामले की जांच के साथ यह देखना भी जरूरी है कि पूर्व की कार्रवाइयों के बाद निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी हुई।
अब डीएम अविनाश सिंह से जवाबदेही तय करने की उम्मीद
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की सक्रियता का है। प्रशासन को वायरल वीडियो की तकनीकी जांच, संबंधित भूमि के अभिलेख, परमिट, मशीनों और मिट्टी परिवहन के दस्तावेजों का सत्यापन कराना चाहिए।
यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही विभागीय मिलीभगत के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल—जब डीएम की अध्यक्षता में खनन टास्क फोर्स गठित है और अवैध खनन रोकने के स्पष्ट निर्देश हैं, तो आखिर इज्जतनगर में कथित खनन की सच्चाई सामने लाने के लिए कब होगी जांच?
फिलहाल वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, खनन की वैधता और खनन अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।






