दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे आजीवन कारावास का मामला माना।
साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। जांच के बाद पुलिस ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी पांच आरोपियों को दोषी करार दिया।
सजा तय करने के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा कि यह अत्यंत जघन्य अपराध है और दोषियों को फांसी दी जानी चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने दोषियों की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अपराध गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला है, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
अदालत के इस फैसले के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। बचाव पक्ष ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगा। वहीं यह मामला दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल है।





