भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में ‘विष्णुपंत एडवांट व्याख्यान श्रृंखला’ के तहत कानून के छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वकीलों को न्याय के सूत्रधार के रूप में अपनी पहचान दोबारा स्थापित करनी चाहिए, लेकिन नैतिकता को सर्वोपरि रखना जरूरी है।
उन्होंने छात्रों को लगातार सीखते रहने, आत्मनिर्भर सोच विकसित करने और खुद को अपग्रेड करने की सलाह दी। चंद्रचूड़ ने जोर दिया कि कानून के क्षेत्र में ईमानदारी से काम करने वाली नई पीढ़ी के लिए अपार अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने विधि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता बताई और छोटे कस्बों से आए छात्रों की सफलता में ग्रामीण विधि संस्थानों की भूमिका की सराहना की। साथ ही वकीलों से आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों की मदद करने और कानूनी शिक्षा में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील भी की।






