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शतायु जीवन की साक्षी रहीं पत्रकार संजीव आर्य की दादी का 103 वर्ष की आयु में निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

रिपोर्ट :- चंद्रकिशोर पासवान

बखरी (बेगूसराय)। हिन्दी पत्रकारिता जगत से जुड़े पत्रकार संजीव आर्य व इलेक्ट्रॉनिक मिडिया से जुड़े पत्रकार कोमल आर्य की दादी का बुधवार कि देर रात को 103 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से ना केवल आर्य परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त हो गई है। दादी मां ने अपने आवास पर शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली। वे कुछ दिनों से वृद्धावस्था जनित रोगों से पीड़ित थीं। दादी मां का जीवन सादगी, तपस्या और पारिवारिक संस्कारों की अनुपम मिसाल रहा। उन्होंने अपने शतायु जीवन में सामाजिक, पारिवारिक और राष्ट्रीय परिवर्तनों के अनेक ऐतिहासिक दौर देखे। उनका स्नेह, अनुभव और मार्गदर्शन परिवार की चार पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा। वे परिवार की धुरी के रूप में जानी जाती थीं, जिनके सान्निध्य में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण हुआ।उनके पुत्र शलैन्द्र आर्य ने बताया कि मेरी मां धार्मिक प्रवृत्ति की, अत्यंत सरल स्वभाव की और कर्मनिष्ठ थीं। परिवार के प्रत्येक निर्णय में उनका अनुभव मार्गदर्शक रहा। उनके आशीर्वाद को परिवार अपनी सबसे बड़ी धरोहर मानता था। उनके निधन से उत्पन्न शून्यता को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं पत्रकार साथियों ने उनके आवास पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। सभी ने उनके दीर्घ, गरिमामय एवं प्रेरणादायी जीवन को नमन करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकसंतप्त परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से कामना की। पत्रकार संजीव आर्य किदादी मां का अंतिम संस्कार पारंपरिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों व शुभचिंतकों की उपस्थिति रही। उनका स्मरण सदैव एक आदर्श परिवारजन के रूप में किया जाता रहेगा।

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