भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में सी.पी. राधाकृष्णन चुने गए हैं। उन्हें 452 वोट मिले, जो साफ तौर पर दिखाता है कि उनके नाम पर ज़बरदस्त सहमति बनी। अभी तक वो महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे, लेकिन अब वो देश के दूसरे सबसे ऊंचे संवैधानिक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ। आमतौर पर लोग जब कॉलेज के सपने देखते हैं, उन्होंने तब ही RSS से जुड़कर राष्ट्रसेवा की राह पकड़ ली थी।
लोकसभा से लेकर राज्यपाल पद तक का सफर
उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत 1998 में हुई, जब वे पहली बार कोयंबटूर से सांसद बने। और सिर्फ एक बार नहीं, 1999 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। ये जीत खास इसलिए थी क्योंकि तब कोयंबटूर बम धमाकों के बाद का माहौल था, और भाजपा को पहली बार तमिलनाडु में तीन सीटें मिली थीं।
पार्टी के भीतर भी मजबूत पकड़
2004 से 2007 तक उन्होंने तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष की कमान संभाली। इतना ही नहीं, वो पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भी सक्रिय सदस्य रहे। 2014 और 2019 में उन्होंने फिर से कोयंबटूर से लोकसभा चुनाव लड़ा और 2014 में उन्हें करीब 3.89 लाख वोट मिले, हालांकि वो जीत नहीं सके।
प्रशासनिक अनुभव भी है भरपूर
सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि प्रशासन में भी उनका अनुभव मजबूत रहा है। 2016 से 2020 तक उन्होंने कोयर बोर्ड (जो केंद्र सरकार के MSME मंत्रालय के तहत आता है) के चेयरमैन के रूप में काम किया। इसके बाद 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने खासतौर पर आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण पर फोकस किया। फिर 2024 में वे महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल बने और वहां भी संतुलित और सहयोगात्मक भूमिका निभाई। नए भारत के नए उपराष्ट्रपति
अब, सी.पी. राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। संघ की जमीन से उठे, संसद में दो बार पहुंचे, पार्टी संगठन और प्रशासनिक पदों पर काम किया ये उनकी राजनीतिक यात्रा का सार है। वे उस पीढ़ी से आते हैं जो ज़्यादा बोलती नहीं, लेकिन हर जिम्मेदारी निभाने में भरोसेमंद साबित होती है।






