उत्तर प्रदेश की सियासत में सहारनपुर से जुड़ा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। 20 अगस्त 2026 को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शायान मसूद को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके बाद शायान ने अपने ससुर इमरान मसूद की राजनीतिक सोच और उनके हालिया रुख पर खुलकर असहमति जताई।
इमरान मसूद की विचारधारा से सहमत नहीं- शायान
सपा में शामिल होने के बाद शायान मसूद ने कहा कि वह इमरान मसूद की विचारधारा से सहमत नहीं हैं। उनका कहना था कि अगर लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को हराना है, तो बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई को मजबूत करना जरूरी है।
शायान ने आरोप लगाया कि इमरान मसूद लगातार अखिलेश यादव पर हमला कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जब कोई नेता बीजेपी को हराने की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ अखिलेश यादव पर निशाना साधता है, तो इससे बीजेपी को राजनीतिक फायदा पहुंच सकता है।
“अखिलेश को मजबूत करना है”
शायान मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को चुनौती देने के लिए अखिलेश यादव को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने इमरान मसूद की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी नजर में सिर्फ अखिलेश यादव को निशाना बनाना सही रणनीति नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके और इमरान मसूद के बीच राजनीतिक और वैचारिक मतभेद हैं और इसी वजह से उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता चुना है।
इमरान मसूद के परिवार से है करीबी रिश्ता
शायान मसूद का राजनीतिक और पारिवारिक जुड़ाव सहारनपुर के प्रभावशाली मसूद परिवार से है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद के पौत्र और शाजान मसूद के पुत्र हैं। उनकी शादी इमरान मसूद की बेटी से हुई है। इस तरह शायान का रिश्ता एक ही समय में सहारनपुर के दो प्रमुख राजनीतिक परिवारों से जुड़ा हुआ है।
शायान इससे पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सहारनपुर से इमरान मसूद के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी। ऐसे में अब उनका सपा में जाना राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदले समीकरण
शायान मसूद का सपा में जाना ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। हाल के दिनों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और सीटों को लेकर अलग-अलग रुख सामने आते रहे हैं।
इसी राजनीतिक माहौल में शायान का कांग्रेस छोड़ना और सपा में शामिल होना सहारनपुर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परिवार से अलग राजनीतिक राह
शायान का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में वह इमरान मसूद के समर्थन में सक्रिय थे। अब वही शायान सार्वजनिक तौर पर इमरान मसूद की राजनीतिक सोच से असहमति जता रहे हैं और अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी को अपना नया राजनीतिक मंच बना चुके हैं।
सपा में शामिल होने के बाद शायान ने अखिलेश यादव से मुलाकात भी की। उनके बयान से साफ है कि वह आगामी राजनीतिक लड़ाई में सपा को मजबूत करने और बीजेपी के खिलाफ विपक्षी राजनीति को धार देने को अपनी प्राथमिकता बता रहे हैं।
सहारनपुर की सियासत में बढ़ेगी हलचल
शायान मसूद के सपा में जाने के बाद सहारनपुर की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ इमरान मसूद कांग्रेस में अपनी राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं, वहीं उनके दामाद ने समाजवादी पार्टी का रास्ता चुना है। अब देखना होगा कि यह राजनीतिक दूरी आने वाले समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति को किस तरह प्रभावित करती है।






