रिपोर्ट: अखिलेश गौतम
सीतापुर। विकासखंड पिसावां की ग्राम पंचायत चिरहुला में प्रधान और सचिव की मिलीभगत से सरकारी धन की खुली लूट का मामला सामने आया है। शासन की गाइडलाइन को दरकिनार कर प्रधान ने अपने व्यक्तिगत खाते में “मजदूरी व अन्य कार्य” दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान करवा लिया। वहीं मनरेगा योजना में भी फर्जी मास्टर रोल बनाकर लाखों रुपये डकारे गए।
मामला 1: प्रधान के खाते में अवैध भुगतान शासन द्वारा जारी स्पष्ट निर्देश है कि ग्राम प्रधान को मानदेय के अलावा किसी भी कार्य का भुगतान उनके खाते में नहीं किया जा सकता। निर्माण कार्य, मजदूरी व सामग्री का भुगतान सीधे लाभार्थी, मजदूर या आपूर्तिकर्ता के खाते में डीबीटी के माध्यम से होना चाहिए।
लेकिन वित्तीय सत्र 2024-25 में चिरहुला में प्रधान-सचिव ने मिलीभगत कर प्रधान के ही खाते में “मजदूरी व अन्य कार्य” के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
प्रमुख अनियमितताएं:
- शासनादेश का उल्लंघन: प्रधान को केवल मानदेय देय है। विकास कार्यों का भुगतान प्रधान के खाते में करना पूर्णतः अवैध है।
- डीबीटी नियमों की अनदेखी: पारदर्शिता के लिए बने डीबीटी सिस्टम को बाईपास कर एक व्यक्ति के खाते में मोटी रकम भेजी गई।
मामला 2: मनरेगा में एक श्रमिक फोटो, कई मास्टर रोल का खेल
मनरेगा में भी बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है। आरोप है कि कुछ गिने-चुने श्रमिकों की फोटो खींचकर उसे एडिट कर अलग-अलग मास्टर रोल और अलग-अलग तारीखों पर अपलोड कर दिया गया।
इस तरह एक ही श्रमिक को एक ही दिन कई जगह काम पर दिखाकर लाखों रुपये का फर्जी भुगतान निकाल लिया गया। मनरेगा योजना की गाइडलाइन और उपस्थिति के नियमों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।
ग्रामीणों में आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग:
इस घोटाले से गांव में भारी रोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सचिव ने सरकारी धन को अपनी निजी संपत्ति समझ लिया है।
ग्रामवासियों ने मांग की है:
- प्रधान के खाते में हुए समस्त भुगतान की वित्तीय वर्ष 2024-25 की तत्काल ऑडिट कराई जाए
- मनरेगा के सभी मास्टर रोल की पर अपलोड फ़ोटो की जांच की जाए
3.गबन की गई पूरी धनराशि की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कराई जाए
क्या कहता है नियम
पंचायतीराज विभाग गाइडलाइन में स्पष्ट है। प्रधान को विकास निधि का भुगतान नहीं मिल सकता।






