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“काशी में जलप्रलय: मंदिर-स्कल्पचर डूबे, रास्ते बंद!”

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। आने वाले कुछ घंटों में जलस्तर और तेज़ी से बढ़ने के आसार हैं। इसकी एक बड़ी वजह कानपुर गंगा बैराज से छोड़ा गया लगभग डेढ़ लाख क्यूसेक पानी है, जो अगले चार दिनों में बनारस तक पहुंचने वाला है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, 28 जुलाई से गंगा में पानी का स्तर लगातार ऊपर जा रहा है और अब तक करीब 4.84 मीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। सोमवार को पूरे दिन जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ता रहा—हर घंटे करीब आधा सेंटीमीटर—लेकिन शाम सात बजे के बाद ये रफ्तार बढ़कर एक सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गई। आयोग का कहना है कि अगले 24 घंटों तक यही बढ़त जारी रह सकती है।

स्थिति सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं है—बलिया, मिर्जापुर और गाजीपुर जैसे जिलों में भी गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है। बलिया में गंगा 59.61 मीटर पर बह रही है जबकि खतरे का निशान 57.61 मीटर है। मिर्जापुर में जलस्तर 78.37 मीटर है (खतरे का निशान: 77.72 मीटर) और गाजीपुर में ये 64.35 मीटर तक पहुंच चुका है, जो खतरे की सीमा 63.10 मीटर से ऊपर है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानपुर बैराज से छोड़ा गया पानी जब इन इलाकों में पहुंचेगा, तब हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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