मसूरी की ठंडी सुबह हर दिन की तरह शांत थी। दुकानों के शटर धीरे-धीरे खुल रहे थे, लोग चाय की चुस्की लेते हुए अपने दिन की शुरुआत कर रहे थे। लेकिन अचानक उस सुकून भरी सुबह में चीख-पुकार गूंजने लगी। माल रोड पर एक दुकान से काला धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में किसी को यकीन नहीं हुआ कि ये आग है, लेकिन चंद सेकंडों में लपटें भड़क उठीं। दुकान के भीतर रखे सपनों की तरह सजा हुआ सामान आग में जलता जा रहा था… और कोई कुछ नहीं कर पा रहा था।घटना सुबह करीब 9 बजे की है। आसपास के दुकानदार और राहगीर दौड़कर पहुंचे, किसी ने पानी फेंका, किसी ने फोन उठाकर फायर ब्रिगेड को सूचना दी। दमकल की टीम कुछ ही देर में पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी — आग ने सबकुछ निगल लिया था।
धुआं इतना गाढ़ा था कि पास की तीन दुकानों में भी भर गया। लोग घबराकर बाहर भागे, बच्चों को उठाकर माएं दौड़ीं, बुजुर्ग सहारे ढूंढते रहे। गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन नुकसान सिर्फ चीज़ों का नहीं था — कई लोगों की रोज़ी-रोटी उस दुकान से जुड़ी थी।आंखों में आंसू, होंठों पर खामोशी और दिलों में एक ही सवाल तैरता रहा — काश कुछ मिनट पहले मदद मिल जाती… काश यह सब न हुआ होता।






