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“चुनाव आयोग या सरकार की कठपुतली? कपिल सिब्बल का तीखा वार!”

राज्यसभा सांसद और देश के वरिष्ठ वकीलों में शुमार कपिल सिब्बल ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है — सवाल देश की लोकतांत्रिक आत्मा पर। उन्होंने कहा कि आज जिस चुनाव आयोग को निष्पक्ष और स्वतंत्र होना चाहिए था, वह अब सरकार की कठपुतली बनकर काम कर रहा है।सिब्बल की ये प्रतिक्रिया बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर आई है। उन्होंने इस प्रक्रिया को न सिर्फ असंवैधानिक बताया, बल्कि इसे लोकतंत्र की जड़ों पर हमला करार दिया। उनका कहना है कि इसके ज़रिए बहुसंख्यकवादी सोच वाली सरकारें सत्ता में बनी रहें, इसके लिए पूरा सिस्टम बदला जा रहा है।

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पीटीआई से बातचीत में सिब्बल ने खुलकर कहा कि चुनाव आयोग को यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं। वो भी तब, जब यह फ़ैसला किसी ब्लॉक स्तर के अधिकारी के हाथों में सौंपा जा रहा है।”क्या एक छोटा सा अधिकारी तय करेगा कि किसी गरीब, दलित या आदिवासी का वोट रहेगा या नहीं?” — सिब्बल की आवाज़ में नाराज़गी भी थी और दर्द भी। उन्होंने चेताया कि ये प्रक्रिया एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती है, जिसमें हाशिए पर खड़े समुदायों को लोकतांत्रिक भागीदारी से बाहर किया जा रहा है — ताकि सत्ता में बैठे लोगों के लिए रास्ता साफ हो सके।

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