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किसान आंदोलन के 2 महीने पूरे- आज 26 जनवरी की परेड का रूट तय करेंगे किसान….

  • 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को पुलिस ने मंजूरी दे दी है. किसान नेताओं ने कहा कि किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करेंगे. परेड का रूट कल फाइनल होगा. शनिवार को किसान नेताओं और पुलिस के बीच बैठक हुई. इस बैठक के बाद स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने कहा कि 26 जनवरी को किसान इस देश में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड करेगा.

, नई दिल्ली : किसानों के आंदोलन का आज 60वां दिन है। यानी किसान आंदोलन को शुरू हुए ठीक दो महीने आज पूरे हो जाएंगे। हाड़ गला देने वाली ठंड के बीच  कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस मसले के समाधान के लिए सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच अबतक 11 दौर की बैठक हो चुकी है, लेकिन दूर-दूर तक कोई हल नहीं निकल सकता है। सरकार कृषि कानून को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने और इसमें संशोधन के लिए तैयार है लेकिन किसानों को कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। लिहाजा दोनों तरफ से गतिरोध बना हुआ है।

जानकारी के मुताबिक 26 जनवरी को होने वाली किसानों की ट्रैक्टर रैली को पुलिस ने शनिवार को मंजूरी दे दी है। किसान नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा है कि किसान दिल्ली में प्रवेश करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से मार्च करेंगे। परेड का रूट आज फाइनल किया जाएगा। शनिवार को किसान नेताओं और पुलिस के बीच बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने कहा कि ’26 जनवरी को किसान इस देश में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड करेगा। पांच दौर की वार्ता के बाद ये सारी बातें कबूल हो गई हैं। सारे बैरिकेड खुलेंगे, हम दिल्ली के अंदर जाएंगे और मार्च करेंगे। रूट के बारे में मोटे तौर पर सहमति बन गई है।’

वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि किसानों ने अभी तक हमें कोई लिखित रुट नहीं दिया है, लिखित रुट आएगा, उसके बाद बताएंगे। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक किसानों को रिंग रोड के बाहर जो रूट बताया गया था। उसपर सहमति बन गई है. 26 तारीख को किसान ट्रैक्टर रैली करेंगे। बॉर्डर के पास के ही इलाकों में होगी रैली. रिंग रोड पर नहीं जा सकते किसान।

शुक्रवार को किसान प्रतिनिधियों और सरकार के बीच 11वें दौर की बैठक हुई। लेकिन दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। इस बैठक में सरकार की तरफ से किसान नेताओं को  सख्त संदेश दिया। सरकार डेढ़ साल तक इन कानूनों पर रोक लगाने के प्रस्ताव  पर अडिग रही तो किसानों ने कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। अब सरकार आगे बात करने से मना कर चुकी है।  सरकार की तरफ से यह भी साफ कर दिया गया कि कानून में कोई कमी नहीं है। सरकार कानून पर बिंदुवार चर्चा ही कर सकती है लेकिन कानूनवापसी का कोई सवाल नहीं है।

आपको बता दें कि कड़ाके की सर्दी और  गिरते पारे के साथ-साथ कोरोना के खतरों के बीच 26 नवंबर से बड़ी तादाद में किसान दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर डटे हैं। लेकिन किसान और सरकार के बीच अबतक इस मसले पर अबतक कोई सहमति नहीं बन पाई है। बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारी किसान सिंधु, टिकरी, पलवल, गाजीपुर सहित कई बॉर्डर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन की वजह से दिल्ली की कई सीमाएं सील हैं।

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