धराली गांव में 5 अगस्त की त्रासदी को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन मलबे के ढेर के बीच अपनों की तलाश अब भी थमी नहीं है। इस हादसे ने गांव की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है—जहां कभी लोग खेतों में फसल की देखभाल करते थे, आज हर सुबह आपदा स्थल पर पहुंचकर उम्मीद से खोजबीन करते हैं। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ लगातार मलबा हटाकर लापता लोगों को ढूंढ रहे हैं। कई घर और होटल जमींदोज हो चुके हैं। बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क बहाल हो चुके हैं, बीआरओ सड़क और पुल बनाने में जुटा है, राहत सामग्री घोड़े-खच्चरों से पहुंच रही है। फिर भी, जिनके सपने और सहारे मलबे में दब गए, उनके लिए जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाना अब भी एक लंबी और कठिन जंग है।






