सहारनपुर! उत्तर प्रदेश में शमशान घाटों एवं कब्रिस्तानों के सौंदर्य करण,चार दिवारी करने के साथ-साथ टीन शैड डालने के काम कर कईं तत्कालीन राज्य सरकारों के मुखिया सस्ती वाहवाही लूटते रहे हैं! परन्तु अफसोस है कि जनपद सहारनपुर की वर्तमान सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र के कस्बा गागलहेडी में सनातन धर्म के अनुयायो के कोई ऐसा सार्वजनिक शमशान घाट नहीं है जहां पर सनातन धर्म के मानने वाले अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार (दाह संस्कार) कर सकें यह हाल तब है जब देश को आजाद हुए 78 साल पूरे हो चुके सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र पूर्व में हरोड़ा विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती तत्कालीन हरोड़ा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार साल 1996 में चुनाव जीतकर उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पहुँची और सुबे की मुख्यमंत्री बनी थी बसपा सुप्रीमो इस विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक निर्वाचित हुई एवं मुख्यमंत्री बनी लेकिन उनके द्वारा भी ग्राम पंचायत गागलहडी में सार्वजनिक शमशान घाट नहीं है नतीजा सर्दी गर्मी व बरसात के दिनों ग्रामीण अपने मृत परिजनों का दाहसंस्कार सहारनपुर देहरादून रोड पर स्थित हिंडन नदी के पुराने पुल के नीचे करते हैं देश की आजादी के बाद इस विधानसभा क्षेत्र से स्वर्गीय शकुंतला देवी (कांग्रेस) स्वर्गीय विमला राकेश (सपा) मोहर सिंह (भाजपा) से विधायक रहे परंतु इनमें से किसी ने भी गागलहेडी के ग्रामीणों की शमशान घाट की समस्या का निधान नहीं कराया मौजूदा समय मैं यह विधान सभा सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है तथा सपा के आसू मलिक विधायक हैं इससे पूर्व कांग्रेस के मसूद अख्तर सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं परंतु ना तो विधायक और ना ही ग्राम प्रधान शमशान घाट बनवाने के प्रतीक गंभीर हैं!
रिपोर्ट : नईम सागर






