त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव जैसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन में कोई भी कोना अछूता न रह जाए, इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। उन दूर-दराज और दुर्गम इलाकों में, जहां मोबाइल नेटवर्क का नामोनिशान नहीं है, अब पुलिस के वायरलेस और सेटेलाइट फोन चुनावी सूचनाओं का पुल बनेंगे।मंगलवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने सभी विभागों के नोडल अफसरों के साथ एक वर्चुअल बैठक की और साफ शब्दों में निर्देश दिया कि चुनाव के दौरान हर कंट्रोल रूम 24×7 एक्टिव रहेगा। किसी भी सूचना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाएगी—चाहे वो सड़क बाधित हो, मौसम खराब हो या किसी पोलिंग पार्टी को मदद चाहिए हो।
उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि हर पोलिंग पार्टी सही समय पर, सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंचे। जहां कहीं भी सड़कें टूटें या रास्ते बाधित हों, वहां लोक निर्माण विभाग समेत संबंधित एजेंसियां तुरंत हरकत में आएं।निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल गोयल ने भी भरोसा दिलाया कि इस बार चुनावी मशीनरी पूरी तरह अलर्ट मोड में है। हर अफसर, हर टीम का एक ही मकसद है—चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी हो।यह तैयारी दिखाती है कि चाहे इलाका कितना भी दुर्गम हो, लोकतंत्र की डोर हर मतदाता तक पहुंचाई जाएगी—बिना किसी रुकावट के।






