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नगर परिषद् चित्रकूट की लापरवाही से कचरे के ढेर से पालीथीन खाकर लगातार गौ वंशों की जा रही जान

रिपोर्ट संजय मिश्रा
चित्रकूट – भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट पर कचरे का साम्राज्य : नगर पंचायत की सड़ांध में डूबी संवेदनहीनता, गोवंश की मौत का ठेकेदार कौन?
भगवान श्री राम की तपोभूमि चित्रकूट में आज आस्था की नहीं, कचरे की दुर्गंध फैली है। पूरे नगर में कचरे के अम्बार, सड़ांध और बदबू से माहौल जहरीला हो चुका है, लेकिन नगर पंचायत का पूरा अमला मानो नींद में कोमा की हालत में है। स्वच्छता प्रभारी से लेकर सीएमओ तक की कार्यशैली पर जनता उठा रही सवाल आखिर किसकी है जवाबदेही। जनता का कहना है कि पढ़े-लिखे अधिकारी होने का ढोंग करने वाला यह तंत्र आज गली-गली सड़ांध का सौदागर बन चुका है। नगर पंचायत के स्वछता प्रभारी हों या सीएमओ, सबकी आंखों पर सत्ता की पट्टी बंधी है। करोड़ों की स्वच्छता योजनाओं का पैसा फाइलों में डकार लिया गया और जमीनी हकीकत में बची सिर्फ गंदगी, जिसमें गोवंश अपनी जान जोखिम में डालकर कचरा खाने को मजबूर हैं। पवित्र चित्रकूट की धरती पर मरते हुए बेजुबानों की चीखें इन कुंभकर्णी अफसरों के कानों तक नहीं पहुंचतीं।
सवाल उठता है—नगर पंचायत का यह कचरा साम्राज्य आखिर किसके संरक्षण में पल रहा है? क्या नगर पंचायत सिर्फ नाम की है और काम में “कचरा माफिया” का अड्डा बन चुकी है? जब तपोभूमि का हर कोना कचरे में दफन हो रहा है, तब सीएमओ और उनका पूरा अमला किस घोटाले की नींद में सो रहा है? गोवंश की मौत, आस्था का अपमान और जनता की सांस तक रोक देने वाली इस गंदगी का ठेकेदार आखिर कौन है?
चित्रकूट की जनता अब पूछ रही है—नगर पंचायत का ताज पहनकर ये अधिकारी सेवा करने आए हैं या तपोभूमि को कचरे का शवगृह बनाने?

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