सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें 11 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसके तहत सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि यह समस्या दरअसल स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही और निष्क्रियता का नतीजा है, और जो लोग इस मामले में हस्तक्षेप कर रहे हैं, उन्हें भी जिम्मेदारी उठानी होगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चिंता जताते हुए बताया कि देश में हर साल 37 लाख से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने का शिकार होते हैं, जिनमें बच्चों की मौत के मामले भी शामिल हैं। उनका कहना था कि यह विवाद का नहीं, समाधान का विषय है। दूसरी ओर, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने स्थिति को “बेहद गंभीर” बताते हुए कहा कि इस मामले पर गहराई से बहस होनी चाहिए और आदेश पर फिलहाल रोक लगनी चाहिए।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखने और 8 हफ्तों के भीतर जरूरी ढांचा तैयार करने का आदेश दिया था, ताकि उन्हें दोबारा सड़कों पर न छोड़ा जाए।






