हयातनगर की दीपा ने ठाना – कोई महिला न रहे कमजोर, गरीब बेटियों की शादी में भी बनती हैं सहारा
रजत मल्होत्रा
संभल। महिलाएं किसी से कमजोर नहीं होती हैं, उन्हें परिस्थिति का मुकाबला करना चाहिए। यह सोच है हयातनगर की रहने वाली समाजसेविका दीपा वार्ष्णेय की। दीपा लगातार महिलाओं व लड़कियों को प्रतियोगिता और अन्य कार्यक्रम आयोजित करके जागरूक करने का काम कर रही हैं।
दीपा वार्ष्णेय का मानना है कि परोपकार करने से शांति का अनुभव होता है। इसी सोच के साथ उन्होंने दो वर्ष पूर्व महिला शक्ति संगठन नामक एक समिति का गठन किया। इसमें नगर की 24 महिलाओं को एकत्र कर उन्होंने समाज सेवा का बीड़ा उठाया।
शुरुआत में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा, क्योंकि समाज सेवा के लिए कोई बड़ी संस्था सहयोग को तैयार नहीं थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनकी समिति महिलाओं को उनके अधिकारों और समाज के प्रति दायित्वों का बोध कराने के लिए लगातार कार्यक्रम कर रही है।
गरीब लड़कियों की शादी कराने में बढ़-चढ़कर लेती हैं हिस्सा
समिति गरीब परिवार की लड़कियों की शादी कराने में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। जहां भी किसी गरीब लड़की की शादी में कोई परेशानी आती है, वहां दीपा वार्ष्णेय और उनकी समिति की महिलाएं पहुंचकर हर संभव सहायता करती हैं। अब तक काफ़ी गरीब लड़कियों की शादी में योगदान दे चुकी हैं।वही दीपा वार्ष्णेय विश्व हिंदू परिषद मात्रशक्ति की जिला संयोजिका भी है.
उनके इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
दीपा वार्ष्णेय बाल संस्कार केंद्र भी चलती है
बच्चों को रोज 1 घंटा इकट्ठा करके अच्छी आदतें, संस्कार और भारतीय संस्कृति सिखाना।
इसमें बच्चों को:
- प्रार्थना, मंत्र, भजन सिखाते हैं
- अच्छी कहानियां सुनाते हैं
- योग, सफाई और अनुशासन सिखाते हैं
- मोबाइल से दूर, अच्छे आचरण की ओर लाते हैं
दीपा का कहना है कि वह जीवनभर इसी तरह समाज सेवा करती रहेंगी। उनके इस कार्य में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।







