खुर्शीद अहमद सिद्दीकी (गुलाम मुस्तफा)
देहरादून एवं उत्तराखंड के तमाम जनप्रतिनिधियों, मुस्लिम समाज के सम्मानित नागरिकों, उलेमाओं, बुद्धिजीवियों और उन सभी अभिभावकों से निवेदन है जो अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना रखते हैं—
आज शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन हो रहे हैं, वे हमारे सामने एक नई चुनौती और अवसर दोनों लेकर आए हैं। मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात हो रही है, और सरकार की ओर से उच्च शिक्षा के माध्यम से डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
ऐसे में प्रश्न यह है—
क्यों न देहरादून जैसे शिक्षा हब में मुस्लिम समाज स्वयं पहल कर एक उच्चस्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना करे?
क्यों न हम सरकार से अनुमति लेकर, University Grants Commission (यूजीसी) के नियमों के अनुरूप एक विश्वविद्यालय स्थापित करें, जो आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय करे?
यह कार्य कठिन अवश्य है, पर असंभव नहीं।
“हिम्मत-ए-मर्दां, मदद-ए-खुदा।”
उच्च शिक्षा हमारे बच्चों का मौलिक और संवैधानिक अधिकार है। यह पहल किसी राजनीतिक दल से ऊपर उठकर, समाजहित में की जानी चाहिए। हमारा लक्ष्य केवल संस्थान बनाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों का द्वार खोलना है।
उत्तराखंड में एक मिसाल कायम होनी चाहिए कि यहाँ के मुसलमानों ने मिलकर समाज के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए देहरादून में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की।
रुकावटें आएंगी, लेकिन—
“उठ, बांध कमर क्यों डरता है,
फिर देख खुदा क्या करता है।”
इंशा अल्लाह, हमारे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह संघर्ष आज से शुरू होता है।
बस आपका साथ, सहयोग और मार्गदर्शन अपेक्षित है।
अपने सुझाव अवश्य साझा करें।






