सागर (मध्यप्रदेश)
लाल साहब लोधी
प्रशिक्षण के बाद भी लापरवाही हुई तो तय होगी सीधी जवाबदेही
शत-प्रतिशत हीमोग्लोबिन जांच, नियमित बीपी मॉनिटरिंग और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की बर्थ मैपिंग पर फोकस करे स्वास्थ्य विभाग
बंडा व शाहगढ़ में मैदानीअमले का उन्मुखीकरण संपन्न
सागर 30 जुलाई 2026
जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) तथा शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सख्त और सक्रिय हो गया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल स्वयं ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण और उन्मुखीकरण सत्रों में शामिल होकर स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले से सीधे रूबरू हो रही हैं।
गुरुवार को बंडा एवं शाहगढ़ ब्लॉक के मैदानी अमले (आशा, एएनएम, सीएचओ आदि) के लिए विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सत्र के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट लहजे में कहर कि इस विशेष प्रशिक्षण के बाद भी यदि काम में किसी प्रकार की लापरवाही या चूक पाई गई, तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी की सीधी जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर श्रीमती पाल ने जोर देकर कहा कि जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य तंत्र की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। आशा का कार्य नवविवाहित योग्य दंपतियों की पहचान से शुरू होकर, गर्भावस्था के पहले 12 हफ्तों के भीतर पंजीयन व एएनसी चेकअप कराने और प्रसव के बाद शिशु की सही देखरेख तक निरंतर चलता है।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जमीनी स्तर पर सही डेटा एकत्र किया जाए और पोर्टल पर उसकी करेक्ट एंट्री समय पर हो। इसमें कोई फर्जीवाड़ा या जल्दबाजी बर्दाश्त नहीं होगी। महिलाओं की प्राथमिक जांच पूरी गंभीरता और पर्याप्त समय देकर करें।
डॉक्टरों को निर्देशित किया गया है कि ओपीडी/आईपीडी में आने वाली गर्भवती महिलाओं की 100% ब्लड सैंपलिंग कर हीमोग्लोबिन की जांच सुनिश्चित की जाए। अगले 6 महीनों के लिए सभी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला (HRPW) की बर्थ मैपिंग की जाए कि, कौन सी गर्भवती महिला किस अस्पताल में कब भर्ती होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी महिला, उसके परिवार तथा संबंधित अस्पताल को पहले से होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि टीकाकरण के पेन्डिंग मामलों को शून्य पर लाने के लिए रणनीति बनाकर काम किया जाए। एएनएम तय दिनों में नियमित रूप से संस्थागत कार्य शुरू करें। बीएमओ और जिम्मेदार अधिकारी प्रतिदिन पोर्टल की समीक्षा करें ताकि वास्तविक स्थिति की मॉनिटरिंग होती रहे।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य अमले को ध्यान दिलाया कि आंकड़ों के अनुसार मातृ मृत्यु की सर्वाधिक आशंका प्रसव के समय तथा शिशु मृत्यु की सर्वाधिक आशंका जन्म के शुरुआती के भीतर होती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा, महिलाएं अब अधिक जागरूक और समझदार हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग का अमला भी पूरी सजगता के साथ काम करे। जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आप सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री विवेक केवी, एसडीएम श्रीमती आरती यादव, सीएमएचओ डॉ देवेश पटेरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।








