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चित्रकूट -जो अपने भूल का एहसास करता है वही मनुष्य है – राष्ट्रीय संत स्वामी कमलदास जी बापू

ब्यूरो संजय मिश्रा
चित्रकूट/अलवर: रामधाम आश्रम शिवरामपुर जिला चित्रकूट उत्तर प्रदेश से अलवर पधारे हुए श्री शिवमहापुराण कथा के राष्ट्रीय कथा वाचक राष्ट्रीय संत स्वामी कमलदास जी बापू ने आज अपने अलवर प्रवास के दौडान कहा कि कुरुक्षेत्र जहां पर युद्ध की महरात्रि आ जाती है चारों तरफ सन्नाटा ही सन्नाटा नजर आना प्रारंभ हो जाता है क्योंकि आज यह युद्ध की अंतिम रात्रि थी
दुर्योधन मरणासन अवस्था में अंतिम घड़ियां गिर रहा था प्राण निकल नहीं रहे थे क्या किया जाए कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था
उसी समय श्री कृष्ण का वहां पर आगमन हो जाता है श्री कृष्ण को अपने सामने देखकर दुर्योधन को गुस्सा तो नहीं आता पर वह श्री कृष्ण के बारे में अपने तीखे व्यंगवाण छोड़ना प्रारंभ कर देता है
अब आपके आत्मा में शांति का अवतरण हो गया होगा दुर्योधन ने श्री कृष्ण को देखते हुए कहा वह अपने मन में जो आ रहा था बोलता ही जा रहा था श्री कृष्णा आराम से दुर्योधन के सारी बातों को सुनते जा रहे थे मुस्कुराते जा रहे थे जब दुर्योधन अपनी वाणी को भी विराम देता है तब श्री कृष्णा दुर्योधन के नजदीक आकर दुर्योधन को संबोधित करना प्रारंभ कर देते हैं
दुर्योधन को युद्ध भूमि में हुई अपनी गलतियों का भी एहसास कराना प्रारंभ कर देते हैं वह यदि गलतियां नहीं करता तो आज महाभारत का युद्ध दुर्योधन तुम आराम से जीत चुका होते।
दुर्योधन श्री कृष्ण के बाद सुनकर आश्चर्य भरी नजरों के साथ निहारत हुए कहा क्या में युद्ध जीत जाता मैंने कौन सी गलती की जिसके कारण मेरे को युद्ध हारना पड़ा दुर्योधन ने प्रश्न प्रस्तुत किया
दुर्योधन तुमने सबसे पहले अच्छा कार्य किया भीष्म पितामह को सेनापति बनाया 10 दिनों तक कुशलता के साथ सेनापति ने अपना दायित्व निभाया उसके पश्चात तुमने द्रोणाचार्य को यह जिम्मेदारी सोपकर बहुत अच्छा कार्य किया 11 से लेकर 15 दिन तक द्रोणाचार्य ने कुशलता के साथ सेना का संचालन किया उसके पश्चात तुमने कर्ण को सेनापति बनाकर अपने जीवन के सबसे बड़ी गलती कर दी इसे एक गलती के कारण आज तेरे को पराजय का सामना करना पड़ रहा है श्री कृष्ण ने गंभीरता के साथ समझाते हुए कहा जबकि तेरे सामने शिव की तरह शक्ति संपन्न व्यक्तित्व तथा अश्वत्थामा जो एक रुद्र का अवतार है युद्ध के 16 वे दिन यदि दुर्योधन तुम कर्ण की जगह अश्वत्थामा को यदि अपना सेनापति बना देता तो तेरी पराजय कभी भी नहीं हो सकती थी तेरे सामने बहुत ही अच्छा समय था तुम अश्वत्थामा को पांडवों के विरोध के अंदर भड़काना प्रारंभ कर देता जिसके कारण अश्वत्थामा बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो जाता तेरे को पता है अश्वत्थामा अमर था पर दुर्योधन तुमने अपने केवल मित्र प्रेम के कारण अपने आप को इतना ज्यादा अंधा बना लेता है ,,विनाश काले विपरीत बुद्धि,, यह कहावत तेरे जीवन में चरितार्थ होने प्रारंभ हो जाती है तेरे को पता है कृपाचार्य में इतनी ज्यादा ताकतवर शक्ति थी एक समय में 60 हजार सेना का मुकाबला कर सकता था लेकिन उनका भांजा कृपाचार्य की बहन कृपी का लड़का अश्वत्थामा में इतना सामर्थ्य था वह एक समय में 72000 योद्धाओं के छक्के छुड़ा सकता था
दुर्योधन तेरे को पता है अश्वत्थमाने युद्ध कौशल की शिक्षा केवल अपने पिता से ही ग्रहण नहीं के थे बल्कि उन्हें युद्ध कौशल की शिक्षा बड़े-बड़े महापुरुषों से प्राप्त की थी जिसमें परशुराम, दुर्वासा, व्यास, भीष्म पितामह, कृपाचार्य आदि थे
ऐसे समय में तुमने अश्वत्थामा की जगह कर्ण को सेनापति का पद देकर महाभारत के युद्ध में सबसे बड़ी भूल की जो आगे चलकर तेरे लिए पराजय का कारण बना दुर्योधन तेरे को पता है मेरे समान ही अश्वत्थामा ने भी 64 कलाओं और 18 विधाओं में पारंगतता हासील की थी दुर्योधन याद है तेरे को 18 दिन रात्रि के समय उल्लू और कोवो की सलाह पर तुमने अश्वत्थामा को सेनापति बनाया था पता है तेरे को अश्वत्थामा ने क्या किया था एक ही रात्रि में पांडवों की बच्ची लाखों सेना और उनके पांच पुत्रों को मौत के घाट उतार दिया था
दुर्योधन यदि तुम पहले ऐसा कर लेता तो आज तेरे को भी मरना नहीं पड़ता पांडवों पर भी तुम जीत दर्ज कर चुका होता अश्वत्थमाने एक रात्रि में कितना पांडवों का विनाश किया था यह काम अश्वत्थामा ने युद्ध के समाप्ति पर किया था जब अश्वत्थामा का यह कार्य दुर्योधन को पता चला था तो उसे सुकून की मृत्यु प्राप्त होती है श्री कृष्ण की बात सुनकर दुर्योधन को अपनी गलती का एहसास हो जाता है उसके कानों में श्री कृष्ण के वह शब्द गुंजित होने प्रारंभ हो जाते हैं जो उसको अपनी भूमिका का एहसास करना प्रारंभ कर सकता है वह भूल थी मित्र प्रेम, भूल का एहसास,

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