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चित्रकूट –ममता संस्था के द्वारा महिलाओ पर होने वाली हिंशा को रोकने के लिए आज अन्तराष्ट्रीय महिला हिंशा उन्मूलन दिवस पर महिलाओ को किया गया जागरूक


चित्रकूट : ममता हेल्थ इंस्टिट्यूट फार मदर एंड चाइल्ड संस्था के प्रोजेक्ट जाग्रति के अंतर्गत ग्राम- खोह, परसौजा , रगौली, भभेट ब्लाक शिवरामपुर व् रामनगर के अनेक गाँवों में महिलाओ पर होने वाली हिंशा को रोकने के लिए अन्तराष्ट्रीय महिला हिंशा उन्मूलन दिवस पर महिलाओ को जागरूक किया गया, कार्यक्रम में पुलिश पदाधिकारी उपस्थित रहे | चौकी प्रभारी राम कुमार दुबे, (उपनिरीक्षक) खोह व् थाना प्रभारी महोदय लाखन सिंह राजापुर, महिला कांस्टेबल आरती वर्मा, एंड नीलू, प्रियंका व् सीनियर एडवोकेट (बार एसोसीयेशन के उपाध्यक्ष) अशोक कुमार शुक्ला की मुख्य भूमिका रही उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित होकर महिलाओ को उनके खिलाफ हो रही किसी प्रकार की हिंशा को रोकने के लिए रोकने के लिए हेल्प लाइन नंबर साझा किया और उन्हें अस्वस्थ किया कि वो इस स्थिति में बिना किसी भय के तुरंत शिकायत दर्ज करे |
थाना प्रभारी लाखन सिंह व् महिला कांस्टेबल आरती वर्मा ने इस बिषय पर विस्तृत जानकारी दी उन्हें अस्वस्थ किया कि बिना किसी भय के यदि किसी भी महिला के परिवार या पति द्वारा शारीरिक, मानसिक, यौन शोषण, भावनात्मक, (मारपीट,गाली गलौज,मानसिक उत्पीडन, यौन शोषण व् आर्थिक शोषण) यौन उत्पीडन किया जाता है तो वो उनके खिलाफ घरेलु हिंशा महिला सरंक्षण अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act 2005) के तहत तुरंत शिकायत दर्ज करे | पीडिता अपने स्थानीय पुलिश स्टेशन में बिना किसी डर के तुरंत शिकायत दर्ज करा सकती है या सीधे मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करा सकती है |
सीनियर एडवोकेट (बार एसोसीयेशन के उपाध्यक्ष) अशोक कुमार शुक्ला घरेलु हिंशा महिला सरंक्षण अधिनियम 2005 (Domestic Violence Act 2005) के तहत उन्हें ये भी बताया गया कि अगर कोई महिला घरेलु हिंशा का शिकार है तो वह अदालत से सरंक्षण आदेश ले सकती है इस आदेश के तहत हिंशा करने वाले व्यक्ति को उस महिला से दूर रहना होगा और वह उसे परेशान भी नहीं कर पायेगा | यदि महिला अपने घर में सुरक्षित महसूस नहीं करती, तो वह आश्रय घर (Shelter Home) में जा सकती है आश्रय घर में पीड़ित महिला को रहने और खाने की जगह दी जाती है, यदि किसी महिला का पति उसे खर्च के पैसे नहीं देता है तो वह अदालत में भरण पोषण का केस दर्ज कर सकती है | घरेलु हिंशा के कारन यदि पीड़ित महिला को चोट लगती है तो वह सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज करा सकती है इसके अलावा यदि पीड़ित महिला को अपने केस (कानूनी सहायता) प्राप्त करने के लिए पैसे न हो तो वह मुफ्त में वकील की सहायता प्राप्त कर सकती है | यदि किसी महिला के बच्चे है और वह घरेलु हिंशा अपराध से परेशान है तो वह अपने बच्चो को अपने पास रखने के लिए अदालत जा सकती है |
ममता संस्था के जिला समन्यवक राजीव कुमार पाठक ने बताया कि महिलाओ के साथ घरेलु हिंशा एक गंभीर अपराध है इससे पीड़ित हर महिला को न्याय प्राप्त करने का अधिकार है महिलाये घरेलु हिंशा के मामलो में , १०९१,१०९०,१८१ हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करके मदद ले सकते है जो २४ घंटे उपलब्ध रहता है |

रिपोर्ट संजय मिश्रा

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