मराठा समाज की आवाज़ बुलंद करते हुए मनोज जरांगे पाटील ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि सोमवार से वह पानी तक पीना बंद कर देंगे। मुंबई के आज़ाद मैदान में धरने के तीसरे दिन उन्होंने कहा, “बिना आरक्षण मैं वापस नहीं जाऊंगा, हमारी मांग संवैधानिक रूप से वैध है।” शनिवार रात उनकी तबीयत बिगड़ी जरूर, लेकिन जांच में सब सामान्य निकला। इसके बावजूद उनका हौसला डगमगाया नहीं। पुलिस ने सिर्फ़ एक दिन की अनुमति दी, जिस पर नाराज़ जरांगे ने कहा कि आंदोलन करने के लिए उन्हें टुकड़ों में इजाज़त नहीं चाहिए।
इस बीच राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा नेता चंद्रकांत पाटील और नितेश राणे का कहना है कि मराठा समाज को ओबीसी की जगह ईडब्ल्यूएस कोटे से लाभ मिलना चाहिए। वहीं, राणे ने एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार पर आंदोलन को आर्थिक मदद देने का आरोप जड़ा। दूसरी ओर, सरकार ने भी हल निकालने के लिए बैठकें तेज कर दी हैं। उपसमिति की बैठक में महाधिवक्ता और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शामिल हुए, लेकिन सरकार साफ कह रही है कि सभी मराठाओं को एक साथ ओबीसी प्रमाणपत्र देना मुमकिन नहीं है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है—क्या इस आंदोलन का कोई ठोस हल निकल पाएगा या संघर्ष और लंबा चलेगा?






