भाजपा छोड़ने के बाद अखिलेश यादव से मुलाकात ने बदले राजनीतिक समीकरण, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की ओर बढ़ते कदमों से सियासी हलचल तेज
बरेली, 11 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। बरेली की आंवला लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके धर्मेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर चल रही चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। भाजपा से इस्तीफे के बाद उनकी इस मुलाकात को रुहेलखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़ने के बाद से ही उनके समाजवादी पार्टी में जाने की अटकलें तेज थीं। अब अखिलेश यादव से मुलाकात की खबर ने इन चर्चाओं को और मजबूती दी है। हालांकि समाजवादी पार्टी की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करने की घोषणा की पुष्टि अभी बाकी है।
भाजपा से नाराजगी के बाद बदले सियासी तेवर
धर्मेंद्र कश्यप लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे। उन्होंने वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी नीरज मौर्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
पिछले कुछ समय से धर्मेंद्र कश्यप की भाजपा नेतृत्व से नाराजगी की खबरें सामने आ रही थीं। उन्होंने पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के सम्मान तथा राजनीतिक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए थे। भाजपा की राज्यसभा प्रत्याशी सूची सामने आने के बाद उनके सोशल मीडिया पर लिखे गए ‘टाटा बाय-बाय’ संदेश ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी थी।
इसके बाद भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देने के घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया।
सपा नेता की जन्मदिन पार्टी से शुरू हुई थीं चर्चाएं
इससे पहले धर्मेंद्र कश्यप बरेली में समाजवादी पार्टी के नेता डॉ. अनीस बेग के जन्मदिन समारोह में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में सपा नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
उस समय धर्मेंद्र कश्यप ने कार्यक्रम में शामिल होने को व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ा बताया था। लेकिन अब अखिलेश यादव से मुलाकात के घटनाक्रम ने उनके समाजवादी पार्टी से बढ़ते राजनीतिक संपर्क को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अखिलेश से मुलाकात के बाद सपा में वापसी के संकेत
धर्मेंद्र कश्यप और अखिलेश यादव की मुलाकात को लेकर पहले भी खबरें सामने आ चुकी हैं। अब सामने आई तस्वीर को उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि तस्वीर की तारीख और मुलाकात के विवरण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों में भी दोनों नेताओं के बीच संपर्क और बातचीत का उल्लेख किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि धर्मेंद्र कश्यप समाजवादी पार्टी में शामिल होते हैं, तो बरेली, आंवला और आसपास के विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। कश्यप समाज में उनकी पहचान और लंबे राजनीतिक अनुभव को देखते हुए यह कदम सपा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
बेटी कीर्ति कश्यप के चुनाव लड़ने की भी चर्चा
धर्मेंद्र कश्यप के राजनीतिक फैसले के साथ उनकी बेटी कीर्ति कश्यप का नाम भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों में कीर्ति कश्यप के आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने और बिथरी चैनपुर सीट से उनकी संभावित दावेदारी की बात सामने आई है। हालांकि टिकट और निर्वाचन क्षेत्र को लेकर पार्टी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
रुहेलखंड में बदल सकता है राजनीतिक गणित
समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में धर्मेंद्र कश्यप जैसे अनुभवी नेता का साथ मिलना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
वहीं भाजपा के लिए भी पूर्व सांसद का इस्तीफा राजनीतिक रूप से अहम है। धर्मेंद्र कश्यप की भविष्य की भूमिका और उनके समर्थकों का रुख आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल अखिलेश यादव से मुलाकात की खबर ने धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट कर दी है, लेकिन सपा में उनकी औपचारिक वापसी की घोषणा होना अभी बाकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि समाजवादी पार्टी उन्हें क्या जिम्मेदारी देती है और 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी।






