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बरेली: 12 करोड़ का स्काईवॉक बना मौत का ठिकाना! संचालन ठप, तीन साल में 6 करोड़ का नुकसान

बरेली। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पटेल चौक पर करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया स्काईवॉक एक ओर तीन साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है, वहीं दूसरी ओर यह अब सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। सोमवार रात स्काईवॉक से गिरकर एक युवक की मौत हो गई। घटना के बाद एक बार फिर इस परियोजना की उपयोगिता और सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार सोमवार रात करीब 9 बजे एक युवक स्काईवॉक से नीचे सड़क पर गिर गया। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर सिविल लाइंस चौकी पुलिस उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां मंगलवार सुबह करीब 4 बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक की उम्र करीब 35 वर्ष बताई जा रही है और उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस शव की शिनाख्त कराने का प्रयास कर रही है।

सीओ प्रथम आशुतोष शिवम के अनुसार प्रारंभिक जांच में युवक के कूड़ा बीनने वाला या नशे का आदी होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि स्काईवॉक के सभी प्रवेश मार्ग पहले से ही कांटेदार तारों से बंद हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग किसी तरह ऊपर पहुंच जाते हैं। आशंका है कि नशे की हालत में संतुलन बिगड़ने से युवक नीचे गिर गया।

यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब 12 करोड़ रुपये का स्काईवॉक पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ा है। नगर निगम के अनुसार इसके संचालन न होने से हर वर्ष करीब 2 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है। अब तक निगम को लगभग 6 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ चुका है।

स्काईवॉक को आधुनिक व्यावसायिक हब के रूप में विकसित किया जाना था। यहां करीब 80 दुकानें बनाई गई थीं, ताकि लोगों को खरीदारी और खानपान की सुविधा मिल सके। साथ ही चौकी चौराहा, बरेली कॉलेज रोड और चौपला की ओर आने-जाने वाले लोगों को बेहतर आवागमन का विकल्प उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन परियोजना शुरू न होने से न जनता को इसका लाभ मिला और न ही नगर निगम को राजस्व।

नगर निगम ने पहले निजी एजेंसी के माध्यम से संचालन की योजना बनाई थी। आनंदी इंटरप्राइजेज को 15 वर्षों के लिए संचालन का जिम्मा भी सौंपा गया था, लेकिन एजेंसी ने काम शुरू नहीं किया। तीन नोटिस जारी होने के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

यदि नगर निगम स्वयं स्काईवॉक का संचालन करेगा तो राजस्व बढ़ेगा और लंबे समय से बंद पड़ी परियोजनाओं को जनता के लिए शुरू किया जा सकेगा।

स्काईवॉक से हुई युवक की मौत ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम इसे कब तक चालू कर पाता है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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