करतला ब्लॉक के ग्राम पंचायत डोंगाआमा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। निर्धारित समय पर केंद्र का दरवाजा बंद मिला और वहां कोई भी मौजूद नहीं था। यह स्थिति सीधे तौर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की गैरजिम्मेदारी को दर्शाती है।
फोन पर संपर्क करने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने कहा कि उनका बच्चा बीमार है और इलाज कराने वे अस्पताल गई हैं। वहीं सहायिका ने भी यही कारण बताया कि उनके बच्चे की तबीयत खराब है, इस वजह से वे केंद्र नहीं आ सकीं। दोनों के एक साथ अनुपस्थित रहने से केंद्र का संचालन पूरी तरह बाधित हो गया।
आंगनबाड़ी केंद्र का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषण आहार, गरम खाना, स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं और माताओं को भी पोषण संबंधी जानकारी देना इसकी अहम जिम्मेदारी होती है। लेकिन केंद्र का लगातार बंद रहना इन सभी उद्देश्यों पर सवाल खड़ा करता है।
यह साफ दिखाई देता है कि कार्यकर्ता और सहायिका अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं निभा रहे हैं। कभी कोई बहाना, तो कभी कोई व्यक्तिगत कारण—इन सबके चलते केंद्र की व्यवस्था चरमराई हुई है। नतीजा यह है कि बच्चों को पोषण और शिक्षा दोनों से वंचित होना पड़ता है।
आंगनबाड़ी जैसे संवेदनशील केंद्र का इस तरह ठप होना केवल एक सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आंगनबाड़ी योजना का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
डोंगाआमा का यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कार्यकर्ताओं की मनमानी और ढिलाई के कारण योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक नहीं पहुँच पा रहा है। जिम्मेदारी के पद पर बैठकर लगातार अनुपस्थित रहना यह साबित करता है कि कार्यकर्ता और सहायिका दोनों ही अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं हैं।
👉🏻अशोक कुमार श्रीवास की खास रिपोर्ट बिलासपुर संभाग हेड 6261129010






