नगर आयुक्त बोले—कर्मचारियों की कमी के चलते नहीं किया कार्यमुक्त, पांच साल से बरेली में तैनाती को लेकर उठे सवाल
बरेली। बरेली नगर निगम में शासन स्तर से स्थानांतरण किए जाने के करीब पांच महीने बाद भी दो कर्मचारियों को कार्यमुक्त नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। शासन से तबादला आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित कर्मचारी अभी तक नगर निगम में ही कार्यरत बताए जा रहे हैं। नगर निगम प्रशासन कर्मचारियों की कमी को इसकी वजह बता रहा है, लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि जब शासन ने स्थानांतरण कर दिया था तो पांच महीने बाद भी आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ और कर्मचारियों को रोकने के लिए सक्षम स्तर से अनुमति ली गई या नहीं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मुख्य सफाई एवं खाद्य निरीक्षक महेन्द्र प्रताप सिंह राठौर का शासन स्तर से करीब पांच महीने पहले बरेली से फिरोजाबाद के लिए स्थानांतरण किया गया था। वहीं सफाई एवं खाद्य निरीक्षक पूर्णिमा का स्थानांतरण पीलीभीत नगर पालिका/निकाय के लिए किया गया था। बताया जा रहा है कि दोनों कर्मचारी करीब पांच वर्षों से बरेली जिले में तैनात हैं। स्थानांतरण आदेश आने के बाद सामान्य तौर पर संबंधित कार्यालय से कार्यमुक्त होकर नई तैनाती वाले स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया होती है, लेकिन इस मामले में दोनों कर्मचारियों को अब तक कार्यमुक्त नहीं किया गया।
नगर आयुक्त बोले—कर्मचारियों की कमी के कारण नहीं किया रिलीव
मामले को लेकर नगर आयुक्त से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि शासन की ओर से दोनों कर्मचारियों के स्थानांतरण के आदेश प्राप्त हुए थे। हालांकि, नगर निगम में कर्मचारियों की कमी होने के कारण दोनों को अभी कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
नगर आयुक्त के इस जवाब के बाद एक और सवाल खड़ा हो गया है कि यदि कर्मचारियों की कमी के कारण शासन के स्थानांतरण आदेश का तत्काल अनुपालन संभव नहीं था तो क्या इस संबंध में शासन अथवा किसी अन्य सक्षम प्राधिकारी को लिखित रूप से अवगत कराया गया? क्या दोनों कर्मचारियों को बरेली में बनाए रखने के लिए किसी स्तर से अनुमति या कोई संशोधित आदेश प्राप्त हुआ? इन सवालों का जवाब संबंधित कार्यालयी रिकॉर्ड और पत्राचार सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पांच महीने तक क्यों नहीं हुआ आदेश का अनुपालन?
मामले में सबसे बड़ा सवाल स्थानांतरण आदेश जारी होने और कर्मचारियों को कार्यमुक्त करने के बीच पांच महीने से अधिक का अंतर है। यदि नगर निगम में कर्मचारियों की कमी थी तो क्या इस अवधि में उनके स्थान पर दूसरे कर्मचारियों की तैनाती के लिए शासन से मांग की गई? यदि मांग की गई तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? वहीं अगर शासन से कोई नया निर्देश नहीं आया तो पुराने स्थानांतरण आदेश की मौजूदा स्थिति क्या है, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।
दोनों कर्मचारियों के करीब पांच वर्षों से बरेली में ही तैनात होने की बात सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या प्रशासनिक आवश्यकता है जिसके कारण शासन से तबादला होने के बाद भी दोनों को कार्यमुक्त नहीं किया जा सका।
वेतन आहरण और वर्तमान तैनाती का आधार भी अहम
स्थानांतरण के बाद भी दोनों कर्मचारियों के बरेली में कार्यरत रहने की स्थिति में उनके वेतन आहरण और वर्तमान तैनाती का प्रशासनिक आधार भी महत्वपूर्ण है। संबंधित कर्मचारियों का वेतन किस पद और किस आदेश के आधार पर बरेली नगर निगम से आहरित हो रहा है, यह रिकॉर्ड से स्पष्ट हो सकता है।
नगर निगम के स्थापना विभाग से संबंधित पत्रावली, शासन का मूल स्थानांतरण आदेश, कर्मचारियों को रोकने के संबंध में किया गया पत्राचार और वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेज इस पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि नगर निगम प्रशासन दोनों कर्मचारियों को कब कार्यमुक्त करता है या उन्हें बरेली में बनाए रखने के लिए शासन से कोई नया आदेश प्राप्त करता है। फिलहाल कर्मचारियों की कमी का हवाला देकर पांच महीने तक स्थानांतरण आदेश लागू न किए जाने से प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।






