महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में मेयर चुनाव से पहले सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। जिन पार्टियों को अब तक आमने-सामने माना जाता था, वे अब एक साथ नजर आ रही हैं। भाजपा और कांग्रेस ने इस्लाम पार्टी को रोकने के लिए रणनीतिक गठबंधन का रास्ता चुना है।
नगर निगम में संख्या बल का गणित इस बार बेहद दिलचस्प है। किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, ऐसे में मेयर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए जोड़-तोड़ और समर्थन की राजनीति तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, इस्लाम पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने साझा उम्मीदवार पर सहमति बनाई है।
स्थानीय स्तर पर इस गठबंधन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाजपा और कांग्रेस के समर्थक जहां इसे ‘रणनीतिक फैसला’ बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे विचारधारा से समझौता करार दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन पूरी तरह से अंकगणित पर आधारित है, न कि वैचारिक मेल पर।
मेयर चुनाव से पहले पार्षदों की बैठकों और संपर्क अभियान का दौर तेज हो गया है। दोनों दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने में जुटे हैं, ताकि वोटिंग के दिन कोई क्रॉस-वोटिंग न हो।
अब सबकी निगाहें मेयर चुनाव की तारीख पर टिकी हैं। क्या यह गठबंधन अपने मकसद में कामयाब होगा, या आखिरी वक्त में कोई नया राजनीतिक समीकरण उभर कर सामने आएगा? मालेगांव की सियासत में फिलहाल हर दिन एक नया अध्याय लिख रहा है।
गजब: महाराष्ट्र में बीजेपी कांग्रेस आ सकते हैं साथ विपक्षी को हराने के लिए गठबंधन की….






