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आलोक वर्मा बनाम केंद्र: सीबीआई के पूर्व चीफ का रैंक घटा सकती है सरकार, वर्मा की ढाल बनेंगे ये …

सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ केंद्र सरकार कार्रवाई के मूड में दिखाई दे रही है।

इसी आधार पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

आलोक वर्मा ने जब सीबीआई निदेशक का कार्यभार संभाला तो वे देश के सबसे वरिष्ठ ‘आईपीएस’ थे।

हालांकि उनके खिलाफ जांच का आदेश देना, इसमें किसी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।

रिटायरमेंट से चार साल पहले तक किसी केस में जांच हो सकती है सरकार चाहे तो उनका रैंक घटा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐसे ही अलग-अलग 12 मामलों में सुनाए गए फैसले तत्कालीन सीबीआई निदेशक ‘वर्मा’ की पेंशन बचा सकते हैं।

पूर्व आईपीएस कहते हैं, ऐसे मामलों में आर्थिक दंड की ही ज्यादा संभावना दिखती है।

आलोक वर्मा के मामले में ढाई साल बाद सरकार, कार्रवाई की बात कर रही है, ऐसा क्यों।
ये सवाल कुछ परेशान करने वाला है।

इस मामले में ‘सीवीसी’ और ‘यूपीएससी’ भी शामिल हैं।

डीओपीटी द्वारा जो भी आदेश जारी होगा, उसका मतलब है कि पीएमओ से उसे मंजूरी मिली है।

अब सरकार द्वारा दंड क्या दिया जाता है, ये देखने वाली बात होगी। वर्मा को सर्विस से निकाला जा सकता है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर आलोक वर्मा को अक्तूबर 2018 में पहली बार आधिकारिक तौर पर सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया गया था।

इस कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे।

वर्मा ने यह जिम्मेदारी संभालने से मना कर दिया। उन्होंने सरकार को अपना इस्तीफा भेज दिया।

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