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धान खरीद में गड़बड़ी का आरोप, भाकियू चढूनी ने उठाईं 11 मांगें; समाधान न हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

बरेली। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की सरकारी खरीद को लेकर भारतीय किसान यूनियन चढूनी ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गिल ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मंडलायुक्त बरेली के माध्यम से देकर धान खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान कराने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर प्रदेशभर में प्रत्येक जिले एवं तहसील मुख्यालय पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश की मंडियों में धान की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। संगठन के मुताबिक धान का MSP ग्रेड-A के लिए 2461 रुपये और सामान्य धान के लिए 2441 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके बावजूद किसानों को कथित रूप से करीब 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल में धान बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन का कहना है कि इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

भाकियू चढूनी ने मांग की है कि सरकारी धान खरीद पूरी गति से कराई जाए और मंडियों में आने वाले प्रत्येक किसान का धान खरीदा जाए। खरीद केंद्रों की निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए जाएं तथा सहकारी समितियों के केंद्रों पर खरीद व्यवस्था पारदर्शी बनाई जाए।

संगठन ने राइस मिलों से होने वाली कटौती को लेकर भी मुद्दा उठाया है। मांग की गई है कि राइस मिलर्स द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक कटौती न की जाए। इसके साथ ही मिलों के गेट पर होने वाली खरीद पर रोक लगाने और खरीद प्रक्रिया को नियमानुसार संचालित कराने की मांग की गई है।

ज्ञापन में सहकारी समितियों के क्रय केंद्रों को मंडियों में ही लगाने, क्रय केंद्रों पर संबंधित अधिकारियों की ड्यूटी सुनिश्चित करने और किसानों के धान की निष्पक्ष एवं पारदर्शी खरीद कराने की मांग भी शामिल है। संगठन ने निजी राइस मिलर्स एवं व्यापारियों द्वारा की जाने वाली खरीद की भी निगरानी कराने की मांग उठाई है।

बरेली रोड की सभी शुगर मिलों से किसानों का बकाया भुगतान ब्याज समेत दिलाने और आगामी गन्ना पेराई सत्र के लिए गन्ने का रेट 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग भी ज्ञापन में की गई है।

इसके अलावा भाकियू चढूनी ने आवारा पशुओं को तत्काल पकड़कर गोशालाओं में भेजने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि छुट्टा पशुओं के कारण किसानों की फसलों को नुकसान होता है और किसानों को खेतों की रखवाली करनी पड़ती है।

प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गिल ने कहा कि किसानों से जुड़ी इन समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। ऐसा नहीं होने पर भारतीय किसान यूनियन चढूनी उत्तर प्रदेश में जिला और तहसील मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन कर आंदोलन को व्यापक रूप देगी।

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