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₹800 करोड़ की कथित ठगी का आरोपी फरार, ₹50 हजार का इनाम; Zoom मीटिंग में एजेंटों से संपर्क के दावे ने खड़े किए सवाल

बरेली-बदायूं में 80 से ज्यादा मुकदमों का दावा, लुकआउट नोटिस के बावजूद ऑनलाइन सक्रिय होने की चर्चा; निवेशकों ने payout और funds पर पूछे सवाल, DIG अजय साहनी ने वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को पहचानने से किया इनकार, जांच EOW के पास

बरेली। बदायूं से जुड़े कैनविज निवेश प्रकरण में करीब ₹800 करोड़ की कथित ठगी के आरोपी और फरार चल रहे कन्हैया गुलाटी को लेकर एक कथित Zoom मीटिंग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पुलिस की ओर से जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी पर ₹50 हजार का इनाम घोषित होने और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने की बात सामने आई है, उसी व्यक्ति के अपने नेटवर्क से ऑनलाइन संपर्क में होने के दावे ने जांच को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कन्हैया गुलाटी के खिलाफ बरेली और बदायूं में निवेशकों की शिकायतों पर बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हैं। आरोप है कि कंपनी से जुड़े निवेशकों को आकर्षक मुनाफे और रकम वापस करने का भरोसा देकर निवेश कराया गया, लेकिन बाद में भुगतान रुक गया। इसके बाद निवेशकों ने पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों का दरवाजा खटखटाना शुरू किया।

अब सामने आई कथित Zoom मीटिंग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग में करीब 49 लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि मीटिंग में शामिल कई लोग कंपनी से जुड़े एजेंट या नेटवर्क के सदस्य हो सकते हैं। रिकॉर्डिंग में कन्हैया गुलाटी से निवेशकों के payout, funds और रकम वापस करने को लेकर सवाल किए जाने की बात भी सामने आई है।

पांच प्रतिशत मासिक ब्याज और 22 महीने में रकम लौटाने का था कथित भरोसा

मीडिया रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि कंपनी से जुड़े निवेशकों को बड़े मुनाफे का लालच देकर रकम निवेश कराई गई थी। आरोप है कि निवेशकों को हर महीने करीब पांच प्रतिशत तक ब्याज देने और लगभग 22 महीने बाद मूल रकम वापस करने का भरोसा दिया गया।

शुरुआती दौर में भुगतान मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोगों का भरोसा बढ़ने की बात कही जा रही है। इसके बाद नेटवर्क के माध्यम से और लोगों ने भी रकम निवेश की। लेकिन जब भुगतान बंद हुआ और निवेशकों को उनकी रकम वापस नहीं मिली तो विवाद बढ़ने लगा। इसके बाद अलग-अलग निवेशकों ने पुलिस से शिकायत की और मुकदमे दर्ज होने शुरू हुए।

बरेली और बदायूं में 80 से अधिक मुकदमों का दावा

इस प्रकरण का असर केवल एक जिले तक सीमित नहीं बताया जा रहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कन्हैया गुलाटी के खिलाफ बरेली और बदायूं को मिलाकर 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज होने का दावा किया गया है।

बदायूं में भी कंपनी से जुड़े निवेशकों ने रकम वापस नहीं मिलने और कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायतें की थीं। वहीं बरेली में दर्ज मामलों की जांच और निवेशकों की शिकायतों के चलते आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

सबसे बड़ी चिंता उन निवेशकों की है, जिनकी रकम कथित रूप से इस पूरे नेटवर्क में फंसी हुई है। वे लंबे समय से अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

₹50 हजार का इनाम, लुकआउट नोटिस भी

पुलिस की ओर से कन्हैया गुलाटी की गिरफ्तारी पर ₹50 हजार का इनाम घोषित किए जाने की बात सामने आई है। विदेश भागने की आशंका को देखते हुए उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। रेड कॉर्नर नोटिस से जुड़ी कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

इसी बीच कथित Zoom मीटिंग की स्क्रीन रिकॉर्डिंग ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया है। सवाल उठ रहा है कि यदि फरार आरोपी वास्तव में अपने एजेंटों और नेटवर्क से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क बनाए हुए है तो जांच एजेंसियों के लिए उसके डिजिटल नेटवर्क तक पहुंचना कितना संभव है।

Zoom मीटिंग में payout और funds पर सवाल

वायरल बताई जा रही स्क्रीन रिकॉर्डिंग में ऑनलाइन मीटिंग के दौरान कई लोगों द्वारा कन्हैया गुलाटी से payout और funds को लेकर सवाल किए जाने का दावा है।

मीटिंग में कथित रूप से उससे निवेशकों की रकम जारी करने और कंपनी के पास उपलब्ध फंड की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है। यह बातचीत ऐसे समय सामने आने का दावा किया गया है, जब कन्हैया गुलाटी पुलिस की नजर में फरार आरोपी बताया जा रहा है।

रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें दिखाई देने वाले सभी लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। जांच के दौरान यह स्पष्ट हो सकेगा कि मीटिंग वास्तव में कब हुई, इसे किस अकाउंट से आयोजित किया गया और उसमें शामिल लोगों का मामले से क्या संबंध है।

करीब 49 लोग मीटिंग में दिखाई देने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित Zoom मीटिंग में करीब 49 लोग स्क्रीन पर दिखाई देते हैं। दावा किया गया है कि इनमें कंपनी से जुड़े ‘Lions’ स्तर के लोग भी शामिल थे।

यदि जांच एजेंसी रिकॉर्डिंग को प्रमाणिक पाती है तो मीटिंग में शामिल लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यह पता लगाना जरूरी होगा कि कौन लोग सीधे आरोपी के संपर्क में थे और बातचीत का उद्देश्य क्या था।

‘विनय’ नाम के व्यक्ति की बातचीत का दावा

रिकॉर्डिंग में ‘विनय’ नाम के एक व्यक्ति द्वारा कन्हैया गुलाटी से बातचीत किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। दावा है कि बातचीत के दौरान वह गुलाटी को “आप बरेली मत आना” जैसी बात कहता सुनाई देता है।

इसके बाद बातचीत में DIG बरेली अजय साहनी और SP City का नाम आने का भी दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कथित बातचीत में DIG से करीब 15 मिनट बात होने जैसी बात कही जाती है।

हालांकि यह केवल रिकॉर्डिंग में किए गए कथित दावे हैं। संबंधित पुलिस अधिकारियों से किसी वास्तविक बातचीत या संपर्क की पुष्टि इन दावों से स्वतः नहीं होती।

DIG अजय साहनी ने कहा—वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को नहीं जानता

मीडिया रिपोर्ट में DIG बरेली अजय साहनी का पक्ष भी दिया गया है। उनके मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति को वह नहीं जानते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार DIG ने यह भी स्पष्ट किया कि कन्हैया गुलाटी पर ₹50 हजार का इनाम उन्होंने ही घोषित किया है। मामले की जांच अब EOW को स्थानांतरित हो चुकी है। ऐसे में आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियों और पुलिस की पकड़ से दूर रहने के पहलुओं की जांच आगे संबंधित एजेंसी के स्तर से होने की बात कही गई है।

इस स्पष्टीकरण के बाद कथित रिकॉर्डिंग में पुलिस अधिकारियों के नाम लेकर किए गए दावों की सत्यता की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

डिजिटल नेटवर्क खोल सकता है कई राज

कथित Zoom मीटिंग यदि वास्तविक और हाल की साबित होती है तो जांच की एक महत्वपूर्ण दिशा डिजिटल रिकॉर्ड हो सकते हैं। मीटिंग किस अकाउंट से आयोजित हुई, किन अकाउंटों ने इसमें हिस्सा लिया और आरोपी के संपर्क में कौन-कौन लोग रहे—ये सभी तथ्य जांच में अहम हो सकते हैं।

साथ ही जांच एजेंसी कानूनी प्रक्रिया के तहत उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन से पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर सकती है। इससे यह भी पता चल सकता है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां गई और वर्तमान में संबंधित खातों या संस्थाओं की क्या स्थिति है।

निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल—कब वापस मिलेगी रकम?

पूरे मामले में निवेशकों के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ सबसे महत्वपूर्ण सवाल अपनी जमा पूंजी की वापसी का है। बड़ी संख्या में निवेशकों द्वारा मुकदमे दर्ज कराने का दावा बताता है कि प्रकरण का प्रभाव व्यापक है।

कथित Zoom मीटिंग में भी payout और funds का मुद्दा उठना इसी चिंता को सामने लाता है। यदि रिकॉर्डिंग वास्तविक है तो जांच एजेंसियों के लिए इसमें हुई बातचीत और प्रतिभागियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

अब निगाह EOW की जांच पर है। ₹800 करोड़ की कथित ठगी, 80 से ज्यादा मुकदमों के दावे, ₹50 हजार के इनाम और लुकआउट नोटिस के बीच कथित ऑनलाइन मीटिंग ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि फरार आरोपी के डिजिटल नेटवर्क की कड़ियां जांच एजेंसी को उसके ठिकाने और निवेशकों की रकम तक पहुंचाने में कितनी मदद करती हैं।

नोट: ₹800 करोड़ की कथित ठगी, 80 से अधिक मुकदमे, Zoom मीटिंग में शामिल लोगों की संख्या तथा रिकॉर्डिंग में हुई कथित बातचीत से जुड़े विवरण मीडिया रिपोर्ट/सामने आए दावों पर आधारित हैं। आरोपों और वायरल रिकॉर्डिंग की अंतिम सत्यता जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया से निर्धारित होगी।

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